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खटिया: त्रिवेणी कुशवाहा

खटिया यानी चारपाई जो रस्सी अथवा नेवार से बुनी हुई होती है, वैसे तो सोने व आराम फरमाने के लिए होता है। परन्तु यह...

पिता का पत्र शिक्षक के नाम: मुकेश चौरसिया

प्रिय शिक्षक, मैं यह पत्र हिंदी साहित्य में अमर होने की गरज से नहीं लिख रहा हूँ। बल्कि कल ही मुझे मेरे पीए ने बताया...

पिटनी पर एक निबंध: मुकेश चौरसिया

मित्रो आज हम पिटना/पिटनी की बात करेंगे। इसे मुंगरिया या मोंगरी भी कहते है। यह पुराने जमाने की वाशिंग मशीन हुआ करती थी। मुंगरिया...

मोटापा: त्रिवेणी कुशवाहा

वैसे तो मोटापा इंसान के लिए अभिशाप है, परन्तु यह मोटापा भीम जैसा विशालकाय कद काठी में हो तो वरदान से कम नहीं होता...

दलबदल का वायरस: नवेन्दु उन्मेष

किफायती लाल मेरे शहर के नामीगिरामी नेताओं में शुमार हैं। वे विधायक से लेकर सांसद तक के ओहदे तक पहुंच चुके हैं। सुबह की...

मौन की महिमा- मुकेश चौरसिया

संतो! मौन की महिमा न्यारी। मौन की बड़ी महिमा है। कहा गया है ‘मौनं सर्वार्थ साधनम्’। इसकी महिमा वेदों और पुराणों में है। शास्त्रों...

एक भारतीय गधे की कहानी- मुकेश चौरसिया

(गधों के आगे इस तरह के कोई विशेषण लगाना चाहिए या नहीं यह तो मुझे पता नहीं क्योंकि गधे-घोड़े आदि संज्ञाएं तेजी से विशेषण...

आप बीती जग बीती-मुकेश चौरसिया

बस बेबस “सुनो जी क्या मैंने आपको अपने बस में करके रखा है”? पेपर सामने से हटाकर मैंने अपनी पत्नि ओर देखा। आ...हा...हा.... क्या रूप था।...

अखियां मनुष्य दर्शन की प्यासी- नवेन्दु उन्मेष

चिड़ियाघर में कोयल बहुत मस्ती में थी और जोर-जोर से गा रही थी ’अखियां मनुष्य दर्शन की प्यासी।‘ उसका गीत सुनकर बंदर ने कहा...

महिमा काली डाई की- रवि प्रकाश

डाई काली देखिए, दिखते लोग जवान। पल पल जाती उमर से, बने रहें अनजान।। बने रहें अनजान, उमर भी बीती जाती। झुकी कमर देखते, न सिकुड़ी अपनी...

मरने के बाद- मुकेश चौरसिया

मरने के बाद मुझे एहसास हुआ कि जिंदा रहने के क्या फायदे थे। मैं सोच रहा था कि या तो यमदूत या फरिश्ते मुझे...

बिल्ली की हजयात्रा- मुकेश चौरसिया

बिल्ली पुनः हजयात्रा में जा रही है। इन दिनों स्थानीय समाचार पत्रों में डबल कॉलम में और कुछ में पूरे-पूरे पृष्ठ में विज्ञापन रेट...

सरकार समझ बैठे- दीपक क्रांति

बुरी आदतों की हार को फूलों का हार समझ बैठे अंग्रेजी रटनेवालों को हम समझदार समझ बैठे पाश्चात्य संस्कृति के इस कदर पिछलग्गू हो गए, दिखावे के...

आइटम गर्ल कोरोना का नागिन डांस- नवेन्दु उन्मेष

‘आरा हिले, छपरा हिले, बलिया हिलेला, हमरी लचके जब कमरिया तो जिला हिलेला’ के तर्ज पर जब कोरोना का डांस चीन के बुहान शहर...

भय बिनु होइ न प्रीति- नवेन्दु उन्मेष

हमारे देश में पिटाई और पिटाई शास्त्र का बड़ा महत्व है। घर में अगर बच्चे उधम मचाते हों तो माता-पिता दो तमाचा बच्चों पर...

नेता गिरा रे, सड़क जाम के बाजार में- नवेन्दु उन्मेष

शहर में एक बड़े नेता का आगमन होने वाला था। पुलिस वाले लोगों को सूंघ-सूंघ कर रास्ते में जाने दे रहे थे। चौक-चौराहे पर...

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