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मृगतृष्णा: दिनेश प्रजापत

लोगों की शायद भूख मिटती नहीं है,तब तकमृत्यु दरवाजा खटखटाती नहीं है,जब तककाम, क्रोध, मद, लोभ रहता है,निरंतर हृदय से मस्तिष्क...

यूं बिन बताए जाना- प्रीति चतुर्वेदी

जाता नहीं कोई हमें यूं छोड़कर गया होगा ज़िन्दगी से वो हारकर टूटा होगा उसका दिल अंदर तक रोया होगा वो अकेले रातभर इसलिए चला गया वो मुंह...

आफतों से भरा यह वर्ष- पूजा पनेसर

आफतों से भरा यह वर्ष ना कम था किसी नरक से, जिसे मानव ने बोया और कुदरत ने पिरोया, कहर ना रहा सीमित, ना बच्चा देखा ना बूढ़ा लिया चपेट...

बदलता स्वरूप इंसान- त्रिवेणी कुशवाहा

ईश्वर ने इंसान बनाया, वजूद भूल रहा है, इंसान अपना रंग रूप स्वरूप बदल रहा है। छिन्न भिन्न निज अंग को कर रहा कुरूप, तोड़ रहा दांत कोई तो कोई बनता अनूप। छेदता...

रानी लक्ष्मीबाई- सोनल ओमर

छबीली का बचपन लिखूं मनु का अल्लहड़पन लिखूं आजादी की जो मशाल बनी उस लक्ष्मी का जीवन लिखूं लक्ष्मी की ललकार लिखूं नारी की तलवार लिखूं सबसे पहले लगाई हुई आजादी...

माँ एक अनमोल तोहफा- राजन कुमार

जिन्हें माँ की याद नहीं आती उन्हें माँ की जगह किसकी याद आती है? जिन्हें बहन की याद नहीं आती उन्हें बहन की जगह किसकी याद आती...

वो छुअन ही नशा है- रूची शाही

वो जो चूम के लबों सेपीठ पर लिख गए थेवो छुअन ही नशा हैवो मुहब्बत शराब है तुम हँस के मिलो...

ज़िन्दगी- अतुल पाठक

ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव के आते कई पड़ाव सुख-दुख इक दूजे के पूरक जैसे धूप-छाँव वक़्त का पहिया चलता ही रहता क्षण-क्षण उसका बदलता रहता क्या पता कब तक...

कितना आसान है- जॉनी अहमद

कितना आसान है दुनिया में दिखावा करना किसी की ख़ुदकुशी पे कोई भी दावा करना जब तलक़ ज़िन्दा थे न था कोई रिश्ता उनसे सबको यहाँ आता...

आंखें खुली हैं वक़्त की- पुष्पेन्द्र सिंह

वो चल रहा था बस यूं ही अपने हिसाब से आंखें खुली हैं वक़्त की मेरे ज़वाब से जितना यह मेरी ज़िंदगी मुझको सिखा गई उतना अभी...

सम्वाद होना चाहिए- सोनल ओमर

प्रिय! कारण चाहे कुछ भी हो चुप नहीं हो जाना चाहिए मौन होने से श्रेष्ठकर है कि सम्वाद होना चाहिए प्रतिवाद ही सही, कोप ही सही भले उलाहना ही...

रानी लक्ष्मी बाई- गरिमा गौतम

वीरता की देवी थी साक्षात महाकाली थी रण भूमि में तांडव मचाती लक्ष्मी बाई रानी थी रण चंडी का रूप थी अंग्रेजों की मौत थी बुझती झांसी का वो इकलौता चिराग...

मृत्यु- आलोक कौशिक

जीवन से मोह ही जीवन को जटिल बनाता है और मृत्यु का भय ही मृत्यु को भयावह मृत्यु तो विश्राम देती है अपनी गोद में आराम देती है मृत्यु ही...

सावन में आग- सुरेन्द्र सैनी

देखो  तो  बना दी है कैसी ये लाग बच्चों ने तोड़ दिया राहे-चिराग़ घर से चला लेने, भंडारे का स्वाद पतलून जल गयी, गिरा जब साग बाग़ की तो जैसे लंका सी उजड़ी भवरों ने चूस लिया सारा पराग वक़्त है...

ज़िन्दगी एक एहसास है- राजन कुमार

ज़िन्दगी एक गिफ्ट है, कबूल कीजिए ज़िन्दगी एक एहसास है, महसूस कीजिए ज़िन्दगी एक दर्द है, बाँट लीजिये ज़िन्दगी एक प्यास है, प्यार दीजिये ज़िन्दगी एक मिलन है,...

अदृश्य- जसवीर त्यागी

बहुत कुछ ऐसा होता है जो किसी अभिनय में नहीं उतर पाता किसी बातचीत या इंटरव्यू में उसके संकेत सूत्र नहीं मिलते किसी डायरी में भी वह दर्ज नहीं...

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