Homeमध्य प्रदेशMP News बिजली विभाग में 73 लाख का घोटाला, इंजीनियर पर FIR

MP News बिजली विभाग में 73 लाख का घोटाला, इंजीनियर पर FIR

MP: पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में उस समय हड़कंप मच गया जब “मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना” के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया। कंपनी प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संविदा सहायक अभियंता अवनीश जारोलिया के खिलाफ थाना मकरोनिया, जिला सागर में एफआईआर दर्ज कराई है।

बताया जा रहा है कि योजना के तहत सामग्री आहरण और कार्य निष्पादन में भारी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में लाखों रुपये की सामग्री बिना वैध प्रक्रिया के निकाले जाने की बात सामने आई, जिसके बाद कंपनी ने सख्त कदम उठाया।

MP: सागर में पदस्थ था आरोपी अधिकारी

कंपनी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक अवनीश जारोलिया सागर जिले के एस.टी.सी. उपसंभाग में पदस्थ थे। इसके अलावा उन्हें उपसंभाग-II का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।

अधिकारी के पास दोहरी जिम्मेदारी होने के कारण योजना से जुड़े कई कार्यों की निगरानी भी उन्हीं के हाथ में थी। इसी दौरान सामग्री आहरण और कार्यों के निष्पादन को लेकर शिकायतें मिलने लगीं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया कि योजना के तहत सामग्री निकालने और उपयोग में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। मामला गंभीर होने पर कंपनी मुख्यालय ने तत्काल जांच के आदेश दिए।

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MP: जांच समिति ने खोली गड़बड़ी की पोल

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यालय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड और कार्यों की प्रक्रिया की गहन जांच की।

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया। समिति ने पाया कि बिना विधिवत कार्यादेश जारी किए ही क्षेत्रीय भंडार सागर से करीब 73 लाख रुपये मूल्य की सामग्री आहरित कर ली गई।

इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री निकाले जाने के बावजूद आवश्यक स्वीकृतियां और औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई थीं। यही नहीं, जांच में कई दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां भी सामने आईं।

MP: अलग-अलग पदनामों का इस्तेमाल कर निकाली सामग्री

प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई कि संबंधित अधिकारी ने अलग-अलग पदनामों का उपयोग करते हुए सामग्री आहरित की। जांच समिति के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया कंपनी के दिशा-निर्देशों और संविदा सेवा नियमों के खिलाफ थी।

सूत्रों के मुताबिक दस्तावेजों में कई जगह प्रक्रिया को छिपाने और रिकॉर्ड को भ्रमित करने की कोशिश भी दिखाई दी। इसी कारण कंपनी प्रबंधन ने मामले को सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता माना।

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि नियमों का पालन किए बिना सामग्री निकाली गई और इससे कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता था।

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MP: कंपनी ने दिखाई सख्ती

जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद कंपनी प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संविदा सहायक अभियंता अवनीश जारोलिया की सेवाएं समाप्त कर दीं। कंपनी का कहना है कि शासकीय योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विशेष रूप से किसानों से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

प्रबंधन ने साफ कर दिया कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

MP: थाना मकरोनिया में दर्ज हुई FIR

मामले में थाना मकरोनिया, जिला सागर में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4) के अंतर्गत अपराध क्रमांक 0137/2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सामग्री का वास्तविक उपयोग कहां किया गया।

MP: मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना क्या है

मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना किसानों को बिजली संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। योजना के तहत कृषि पंप कनेक्शन और बिजली सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्य किए जाते हैं।

सरकार की कोशिश है कि किसानों को समय पर बिजली सुविधा मिले और सिंचाई व्यवस्था बेहतर हो सके। यही वजह है कि योजना में बड़ी मात्रा में सामग्री और बजट का उपयोग किया जाता है। ऐसे में यदि योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता सामने आती है तो उसका सीधा असर किसानों और सरकारी संसाधनों पर पड़ता है।

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MP: सरकारी योजनाओं में बढ़ रही निगरानी

पिछले कुछ समय से मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर सरकार और विभाग काफी सख्त नजर आ रहे हैं। कई विभागों में ऑडिट और जांच प्रक्रियाएं तेज की गई हैं ताकि भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के कारण अब अनियमितताओं को छिपाना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। यही वजह है कि अब छोटी से छोटी शिकायत पर भी जांच शुरू की जा रही है।

MP: कर्मचारियों के लिए बड़ा संदेश

इस कार्रवाई को विभागीय कर्मचारियों के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। कंपनी प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि संविदा हो या नियमित कर्मचारी, नियमों के उल्लंघन पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की कार्रवाई से विभागीय पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में अधिकारी नियमों का पालन करने को लेकर ज्यादा सतर्क रहेंगे।

MP: आगे क्या होगा

अब इस पूरे मामले में पुलिस जांच सबसे अहम मानी जा रही है। यदि जांच में और वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामला और बड़ा हो सकता है।

संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसियां सामग्री की खरीद, वितरण और उपयोग से जुड़े अन्य दस्तावेज भी खंगाल सकती हैं। इसके अलावा योजना से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।

फिलहाल इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर अब विभाग और ज्यादा सख्त नजर आ रहे हैं।

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