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एसीएस नीरज मंडलोई भी नहीं हैं आउटसोर्स संरचना के पक्षधर, कहा- TKS की मांगों पर गंभीरता से होगा विचार

मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल विगत दिवस भोपाल के वल्लभ भवन में ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई से मिल और कर्मचारियों की अनेक समस्याओं पर चर्चा की।

तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने अपनी सहृदयता का परिचय तो उसी दिन दे दिया था, जब जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कार्य के दौरान करंट लगने से दिव्यांग हुए संविदा लाइनमैन का अनुबंध नहीं बढ़ाने पर ना केवल उस लाइनमैन का दर्द समझा, अपितु उनकी ही पहल पर संविदा लाइनमैन का अनुबंध बढ़ाया गया। इस जब एसीएस नीरज मंडलोई ने ये कहा कि मैं भी तकनीकी हूं, तब हम सभी को ऐसा लगा कि हमारी आत्मा की बात सुनने वाला कोई अधिकारी आखिरकर मिल ही गया।

हरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि भोपाल में एसीएस नीरज मंडलोई के साथ यह चौथी बार तकनीकी कर्मचारियों की 6 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें नुकंपा नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई और मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ शासन की अनुकंपा नीति के बिंदुओं के आधार पर बिना शर्त अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की मांग की गई कि जिस पर अपर मुख्य सचिव द्वारा कहा गया कि शीघ्र ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

इसके पश्चात एसीएस नीरज मंडलोई को बताया गया कि वर्ष 2005 से लेकर आज तक विद्युत कंपनियों के कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत्त होने से तकनीकी कर्मियों के लगभग 50000 रिक्त पद हो गए हैं। पिछले 20 वर्षों से नियमित भर्ती के विरुद्ध आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है, जिसकी वजह से विद्युत तंत्र मजबूत होने की जगह कमजोर हो रहा है। सभी आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 15-20 वर्षों से लगातार कार्य करने से अनुभवी हो चुके हैं, अतः ओवरहेड की परीक्षा लेकर सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का संविलियन करने की नीति बनाई जाए। करंट का जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों का 20 लाख का दुर्घटना बीमा एवं कम से कम 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा कराया जाए। ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाये, इससे लगातार भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और विद्युत कंपनी बदनाम हो रही है। इस पर एसीएस नीरज मंडलोई ने कहा है कि हम इस तरह की संरचना के पक्षधर नहीं है, विद्युत कंपनी में मैनपावर की अत्यधिक कमी हो गई है, इस पर शीघ्र नियमितीकरण-विनियमितिकरण जैसी कार्यवाही कर उसे पूरा किया जाएगा। 

इसके अलावा एसीएस नीरज मंडलोई को जानकारी दी गई कि ऊर्जा विभाग के द्वारा 28 अप्रैल 2023 को आदेश जारी किया गया था कि आउटसोर्स कर्मचारी को ₹1000 जोखिम भत्ता दिया जावेगा, जबकि नियमित कर्मचारियों को 150 रुपया जोखिम भत्ता दिया जाता है। वहीं संविदा कर्मचारियों को जोखिम भत्ता नहीं दिया जा रहा है, जबकि नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स सभी कर्मचारियों  से जोखिम का कार्य कराया जा रहा है, तो सभी को ₹1000 जोखिम भत्ता दिया जाना चाहिए, इस पर एसीएस नीरज मंडलोई का कहना है कि इस पर शीघ्र कार्यवाही की जावेगी।

इसके बाद नीरज मंडलोई को जानकारी दी गई की सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के हित में निर्णय लिया है कि लगातार 12 महीने कार्य करने वाले उद्योग संस्था में संविदा या ठेका कर्मचारियों को नहीं रखना चाहिए। ऐसे उद्योग संस्था में नियमित कर्मचारी रखना चाहिए, जबकि बिजली विभाग सीधे उपभोक्ता एवं उद्योग से जुड़े हैं, उसमें कार्य करने वाले लाइनमैन होते हैं जो अनवरत सीधे जोखिमपूर्ण कार्य करते हैं। इस पर एसीएस नीरज मंडलोई ने कहा है इस पर विचार किया जावेगा।

एसीएस नीरज मंडलोई को ये भी कहा गया कि लाइन कर्मचारियों को आधुनिक सुरक्षा उपकरण दिए जावे, जैसे-छोटी-छोटी हाइड्रोलिक फोर व्हीलर गाड़ी, लाइनमैन को वोल्टेज डिटेक्टर डिवाइस दी जावे, अच्छे वाले हेलमेट दिए जावे, रबर एंकर शू, हैंड ग्लव्स आदि दिए जाएं, इस पर एसीएस नीरज मंडलोई ने कहा की बड़ी-बड़ी हाइड्रोलिक खरीदी है, उसी प्रकार से छोटी-छोटी हाइड्रोलिक खरीद सकते हैं, इस पर शीघ्र कार्यवाही की जावेगी।

एसीएस नीरज मंडलोई को जानकारी दी गई कि ऊर्जा विभाग के द्वारा 19 जनवरी एवं 14 फरवरी 2024 को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में गृह जिला ट्रांसफर नीति लागू करने के संबंध में पावर मैनेजमेंट कंपनी सहित सभी विद्युत कंपनियों को पत्र लिखकर अभिमत मांगे गए थे। लगभग सभी कंपनी प्रबंधन के द्वारा अभिमत दिए जा चुके हैं। इस पर एसीएस नीरज मंडलोई का कहना है कि स्थानांतरण नीति पर शीघ्र ही कार्यवाही की जावेगी।

चर्चा के दौरान राजकुमार सैनी, इंद्रपाल सिंह, जगदीश मेहरा, मनमोहन आदि उपस्थित थे। एसीएस नीरज मंडलोई के द्वारा संघ प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया गया है कि आपकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जावेगा।

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