जबलपुर। एमपी के सतना स्थित इलाहाबाद बैंक में आउटसोर्स कर्मचारी रहे एक युवक ने ऐसा फर्जीवाड़ा किया कि जांच एजेंसी भी हैरान रह गई। मृत लोगों की पेंशन निकालने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपी ब्रजेश तिवारी को चार साल की सजा सुनाई और 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
जस्टिस रुपेश गुप्ता की अदालत में चले इस मामले की जांच 2017 में जबलपुर सीबीआई ने शिकायत के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने मृत खाताधारकों के खाते से करीब 27.55 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए थे। सबूतों के अभाव में तीन बैंक अधिकारियों को बरी कर दिया गया।
सतना के इलाहाबाद बैंक में सैकड़ों खातों, खासकर पेंशन खातों में गड़बड़ी की शिकायत 2017 में सीबीआई को मिली थी। जांच में खुलासा हुआ कि जिन लोगों की मौत हो चुकी थी।
उनके नाम पर 2011 से 2015 के बीच लगातार पेंशन निकाली जाती रही। पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ बुजुर्गों की करीब 30 हजार रुपए की पेंशन ट्रेजरी फीड के जरिए उनके खातों से निकाल ली गई।
इसके बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर गुप्त जांच शुरू की। इलाहाबाद बैंक में सैकड़ों खातों के बीच जब किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती थी, तो हेड ऑफिस से जोनल ऑफिस को सूचना भेजी जाती थी कि अब संबंधित व्यक्ति की पेंशन बंद की जाए। यह पूरा डाटा आरोपी ब्रजेश तिवारी के पास पहुंचता था।
वह इसी जानकारी का फायदा उठाकर मृत व्यक्तियों के खाते नंबर ट्रेजरी फीड के जरिए बदल देता था। जिससे पेंशन की राशि उसके खाते में ट्रांसफर हो जाती थी। जांच में सामने आया कि 2011 से 2015 के बीच उसने करीब 37 खातों की पेंशन रकम अपने खाते में डलवाई, जिनकी राशि 30 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक थी।
2005 से नौकरी, 2011 से शुरू किया घोटाला-
सतना निवासी आरोपी ब्रजेश तिवारी को साल 2005 में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में नौकरी मिली थी। नौकरी के दौरान उसने कई बैंक मैनेजरों के साथ काम किया।
ग्रेजुएशन तक पढ़े ब्रजेश ने 2011 से ही फर्जीवाड़े का खेल शुरू कर दिया था। 2017 में जबलपुर सीबीआई को एक गुप्त शिकायत मिली कि मृत लोगों के नाम पर भी बैंक से लाखों रुपए की पेंशन निकाली जा रही है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने जांच शुरू कीए जिसमें बड़ा खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि ब्रजेश तिवारी ने कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से पहले हेड ऑफिस से मृत खाताधारकों के खाते नंबर हासिल किएए फिर ट्रिगर फीड सिस्टम में अपना खाता नंबर दर्ज कर पेंशन की रकम अपने खाते में ट्रांसफर कर ली।
ट्रिगर फीड का इस्तेमाल किया-
गौरतलब है कि ट्रिगर फीड इस्तेमाल करते समय खाताधारक का नाम नहीं, केवल खाता नंबर दिखाई देता था। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर आरोपी ने अपने खाते की जानकारी दर्ज कर रकम हड़प ली।
2019 मे चार्जशीट हुई पेश-
जबलपुर सीबीआई की टीम ने शिकायत के बाद जांच करना शुरू कर दिया। 2019 में सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई। जांच चलती रही और आखिरकार 2026 फरवरी को पेंशन घोटाला से संबंधित केस का निर्णय आया।
हालांकि कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर बैंक अधिकारी बादल पटेल, सचिन दुबे व एके गुलाटी को आरोपों से बरी कर दिया। सीबीआई ने मुख्य आरोपी ब्रजेश तिवारी के खिलाफ धारा 420, 468, 471 व 477(ए) के तहत मामला दर्ज किया।
सीबीआई अधिवक्ता अंकित गोयल ने बताया कि 2011 से 2015 के बीच जब आरोपी इलाहाबाद बैंक सतना की मुख्य शाखा में पदस्थ थाए उसी दौरान उसने माह दर माह यह घोटाला किया।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि इसने बैंक अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकते हुए यह फर्जावाड़ा किया।
बैंक की व्यस्तता बनी फर्जीवाड़े का कारण-
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि जिस भी पेंशनधारी की मौत हो जाया करती थी, उसके मृत्यृ प्रमाण पत्र के साथ हेड ऑफिस में जानकारी जाती थी। इसके बाद जोनल ऑफिस को बताया जाता था इस व्यक्ति की मौत हो गई है।
इसका खाता बंद कर दिया जाए। पासवर्ड ब्रजेश तिवारी के पास हुआ करते थे, जिसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने बंद होने वाले खाते की एक पेंशन राशि अपने एकाउंट में ट्रांसफर करवा ली।
आरोपी ने करीब 27 लाख 55 हजार का घोटाला किया थाए जिसके चलते सीबीआई कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।











