बिजली कंपनी के भ्रष्ट अधिकारियों का एक और कारनामा सामने आया है, जहां अधिकारियों ने पहले अवैध ट्रांसफॉर्मर लगाए और फिर उससे अस्थाई बिजली कनेक्शन भी बाँट दिए।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत सागर रीजन के संचा-संधा वृत्त टीकमगढ के अंतर्गत वितरण केन्द्र पलेरा/दिगोडा में अधिकारियों ने पहले दो अवैध ट्रांसफॉर्मर लगाए और फिर उससे अस्थाई बिजली कनेक्शन भी बाँट दिए। इस मामले को बक्सवाहा वितरण केन्द्र में हुए बिजली कंपनी के 38 नग ट्रांसफार्मर के हेरफेर के मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके बाद बिजली कंपनी प्रबंधन ने इस मामले की जांच भी प्रवर्तन विभाग के आला अधियाकरियों को सौंप दी है।
इस पूरे मामले की जांच में सामने आया कि संचा-संधा वृत्त टीकमगढ अंतर्गत जतारा संभाग के पलेरा वितरण केन्द्र में 2 नग कंपनी के वितरण ट्रांसफार्मरों का अवैध रूप से स्थापित होना एवं उससे अस्थाई कनेक्शन होना पाया गया है। तत्संबंध में अधीक्षण अभियंता (सं-सं) टीकमगढ द्वारा पूर्व में कार्यवाही की गई, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण रिपोर्ट में नहीं दी, जिससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमितता उनकी जानकारी में थी।

इसी प्रकार दिगौडा वितरण केन्द्र में अवैध रूप से 4 नग कंपनी के ट्रांसफार्मरों को पत्थरों के चबूतरे बनाकर स्थापित किये जाने के संबंध में अधीक्षण अभियंता (सं-सं) टीकमगढ़ द्वारा अवगत कराया गया है कि सभी ट्रांसफार्मर एचबीडीएस योजना के अंतर्गत रखे गये है।
जिसमें उक्त कथन पर मुख्य अभियंता (प्रवर्तन) सागर द्वारा असहमति व्यक्त की गयी एवं लेख किया गया है कि कंपनी द्वारा क्रियान्वित की गई एचबीडीएस योजना में पत्थर के चबूतरों पर ट्रांसफार्मर स्थापित किये जाने का कोई प्रावधान नहीं था। कार्यपालन अभियंता (प्रवर्तन) टीकमगढ़ की रिपोर्ट से स्पष्ट किया गया है कि सभी कंपनी के ट्रांसफार्मर है जो कि अवैध रूप से स्थापित किये गये हैं।
बिजली कंपनी प्रबंधन ने जांच अधिकारी से कहा है कि यह गंभीर आर्थिक अनियमितता का प्रकरण है, जिसमें सीधे-सीधे कंपनी को आर्थिक हानि पहुंचाई गई है। अतः प्रकरण में त्वरित कार्यवाही करें अन्यथा दस्तावेज खुर्दबुर्द किये जाने की पूर्ण संभावना है।











