Bargi cruise: जबलपुर में हुए चर्चित क्रूज हादसे को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर याचिका में ऐसे कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और क्रूज संचालन की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जांच आयोग के सामने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि आखिर जांच पूरी होने से पहले दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को कैसे नष्ट कर दिया गया? क्या ऐसा करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास था?
इसी मुद्दे को लेकर आज जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष सुनवाई हुई। मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आयोग के सामने अपनी याचिका रखी। सुनवाई के दौरान आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा और आगे भी मंच को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
Bargi cruise: जांच से पहले क्रूज तोड़ने पर उठा सबसे बड़ा सवाल
याचिका में सबसे बड़ा मुद्दा यह उठाया गया कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी हादसे का शिकार हुए क्रूज को जांच से पहले नष्ट करने की अनुमति देता हो। मंच का कहना है कि जब तक हादसे के तकनीकी कारणों की पूरी जांच न हो जाए, तब तक दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
लेकिन यहां प्रशासन ने कथित तौर पर जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट कर दिया। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि मुख्य सबूत ही खत्म कर दिया गया, तो हादसे की निष्पक्ष तकनीकी जांच कैसे होगी? यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बहस शुरू हो गई है।

Bargi cruise: NGT के नियमों की अनदेखी का आरोप
सुनवाई के दौरान नागरिक मंच ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT के आदेशों का भी हवाला दिया। याचिका में बताया गया कि NGT ने 12 सितंबर 2023 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि क्रूज संचालन में फोर स्ट्रोक इंजन का उपयोग अनिवार्य होगा।
इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में सिर्फ 100 हॉर्स पावर का इंजन लगाया गया था। आरोप है कि संचालन के दौरान दूसरा इंजन भी फेल हो गया था, जिससे हादसे की स्थिति और गंभीर हो गई। मंच का दावा है कि यदि नियमों के अनुसार मजबूत इंजन और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो शायद हादसा टाला जा सकता था।
Bargi cruise: पर्यावरण नियमों को लेकर भी घिरा संचालन
याचिका में यह भी कहा गया कि क्रूज संचालकों के पास पर्यावरणीय अनुमति और जरूरी प्रमाण पत्र नहीं थे। NGT के निर्देशों के अनुसार जलाशयों में चलने वाले क्रूज को पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
लेकिन आरोप है कि बिना पर्याप्त दस्तावेजों और फिटनेस जांच के ही क्रूज संचालन जारी रहा। इस लापरवाही ने न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला बल्कि पर्यावरणीय नियमों की भी अनदेखी की गई।
Bargi cruise: अब फिटनेस जांच कैसे होगी?
जांच आयोग के सामने सबसे बड़ा तकनीकी सवाल यही बना हुआ है कि जब क्रूज को नष्ट कर दिया गया है, तो अब उसकी फिटनेस जांच आखिर कैसे होगी?
NGT के आदेश के पैरा 132 में साफ कहा गया है कि किसी भी बोट या क्रूज की फिटनेस प्राथमिक जांच का हिस्सा होगी। लेकिन जब दुर्घटनाग्रस्त क्रूज अब मौजूद ही नहीं है, तो उसकी तकनीकी स्थिति, इंजन क्षमता और सुरक्षा उपकरणों की जांच करना लगभग असंभव हो गया है।
यही वजह है कि आयोग ने इस बिंदु पर गंभीर चिंता जताई और याचिकाकर्ताओं से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है।
Bargi cruise: आयोग ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जांच आयोग ने साफ किया कि नागरिक मंच द्वारा उठाए गए सवाल बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। आयोग ने यह भी संकेत दिए कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और संचालकों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
आयोग अब पूरे मामले में तकनीकी रिपोर्ट, प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा मानकों से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि हादसे के बाद क्रूज को नष्ट करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था।

Bargi cruise: शहर में चर्चा का विषय बना मामला
जबलपुर में यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों का कहना है कि हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों का यह भी कहना है कि पर्यटन और क्रूज संचालन के नाम पर सुरक्षा नियमों से समझौता करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे हो सकते हैं।
Bargi cruise: आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर जांच आयोग की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई अहम दस्तावेज और तकनीकी रिपोर्ट आयोग के सामने पेश की जाएंगी।

यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का बड़ा उदाहरण बन सकता है। साथ ही यह भी तय करेगा कि भविष्य में जल परिवहन और क्रूज संचालन को लेकर कितनी सख्ती बरती जाएगी।











