भोपाल। एमपी की राजधानी भोपाल में महाशिवरात्रि पर आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में किन्नर शंकराचार्य घोषित किए जाने को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर अब संत समाज खुलकर सामने आ गया है। संतो ने कहा कि सनातन परम्परा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि घोषित पदों का खंडन नहीं किया गया तो धारा 420 सहित आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा।
इस मामले को लेकर संतो ने कहा कि बिना किसी अधिकृत धार्मिक प्रक्रिया के शंकराचार्य, जगद्गुरु व महामंडलेश्वर घोषित करना गंभीर विषय है। वहीं स्वामी अनिलानंद ने कहा हम पूछते हैं कि आप हो कौन, किस हैसियत से महंत, महामंडलेश्वर व शंकराचार्य बना रहे हैं। संत बनाने का एक विधान होता है। यह कोई मंचीय कार्यक्रम नहीं कि किसी को भी कोई पद दे दिया। शंकराचार्य पद सनातन परंपरा का सर्वोच्च आध्यात्मिक पद है।
इसकी नियुक्ति एक धार्मिक प्रक्रिया से होती है। जिसमें वेद-वेदांत का गहन ज्ञान, दंडी संन्यास परंपरा व अखाड़ों की मान्यता शामिल होती है। स्वामी जी ने कहा कि शिकायत में 11 दिन की समय सीमा दी गई है। हमें स्पष्टीकरण नहीं चाहिए। स्पष्टीकरण तब मांगा जाता है, जब गलती हो जाए। यहां तो पूरा कार्य ही गलत है। इसलिए घोषित पदों का तत्काल खंडन और निरस्तीकरण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि समय सीमा के भीतर कार्यवाही नहीं हुई तो वे धारा 420 सहित अन्य आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कराएंगे। जब किसी संविधानए किसी मान्य धार्मिक संरचना में प्रावधान नहीं है। फिर भी पद घोषित किए जाते हैं तो यह धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि भोपाल में आयोजित सम्मेलन में राजस्थान के पुष्कर में नई किन्नर शंकराचार्य पीठ स्थापित करने की घोषणा की गई थी। साथ ही चार जगद्गुरु और पांच महामंडलेश्वर भी घोषित किए गए थे।











