खाद की कालाबाजारी व वितरण में भारी अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के शिकार अन्नदाता टोकन लेने के बाद भी सुबह चार बजे से लाइन में लगकर शाम को थक हारकर, मायूस होकर, खाली हाथ घर लौटने मजबूर है। जबलपुर जिले में खाद वितरण एवं मूंग खरीद व्यवस्था चरमरा गई है, पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गई है।
भारत कृषक समाज महकौशल के अध्यक्ष के केके अग्रवाल ने बताया कि लगभग सभी केंद्रों से जानकारियां मिल रही है कि खाद केवल बड़े व प्रभावशील किसानों, दबंगों एवं नेताओं के चहेतों को ही मिल पा रही है, चिन्ह-चिन्ह कर खाद बांटी जा रही है। खास किसान के लिए नियम अलग और आम किसान के लिए नियम अलग हैं। छोटे व आम दर-दर भटक रहे हैं और उनकी व्यथा कोई सुनने वाला नहीं है।
केके अग्रवाल ने बताया कि यही हाल मूंग एवं उड़द उपार्जन का है। प्रभावशील बड़े और पहुँच वाले किसानों का मिट्टी कूड़ा मिला उत्पाद भी पास होकर अंदर हो रहा है और आम किसान भटक रहे हैं। अधिकारियों ने अपने आँख-कान बंद कर रखे हैं। पीछे के दरवाजे से व रात के अंधेरे में काला खेल चल रहा है, जो अधिकारियों की मिली भगत के बिना संभव नहीं है। किसान बेबस है। खेती बाड़ी का काम छोड़कर संघर्ष करने मजबूर हैं।
केके अग्रवाल ने बताया कि लेट खरीद शुरु होने से वैसे भी अधिकांश किसान मंडियों मे व्यापारियों को अपना उत्पाद ओने-पौने दाम में बेच चुके हैं। अब व्यापारियों का माल किसानों के नाम पर, मोटे कमीशन पर खरीद केंद्रों मे खपाया जा रहा है। जिनके पास थोड़ा बहुत माल बचा है, जो असली किसान अपना माल बेचना चाहते हैं, वे शोषण का शिकार हो रहे हैं।
केके अग्रवाल ने किसानों की वास्तविक मैदानी स्थिति से कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए व्यवस्थायें सूचारु करने कड़े कदम उठाने व खाद वितरण व मूंग उपार्जन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है तथा कहा है किसानों के धैर्य की परीक्षा न ली जाये अन्यथा उनका असंतोष शासन-प्रशासन को मंहगा पड़ेगा। अन्नदाता की बद्दुआएं कहीं का नहीं छोड़ेगी। साथ ही किसानों से अपील की गई है कि वे अपने शोषण के विरोध एवं अपने हितों व हकों की रक्षा के लिए एक होकर अपनी आवाज बुलंद करने आगे आएं।










