जबलपुर। एमपी के जबलपुर में स्पेशल आर्म्ड फोर्स (एसएएफ) की छठी बटालियन से जुड़ा ट्रैवलिंग अलाउंस घोटाला अब और बड़ा हो गया है। पहले करीब 2 करोड़ रुपए का बताया जा रहा यह घोटाला बढ़कर लगभग 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। मामले में रांझी थाना पुलिस ने यहां पदस्थ 15 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घोटाले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताए जा रहे एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा लंबे समय से फरार है।
बताया गया है कि मामला तब सामने आया, जब अधिकारियों को अनियमितताओं की भनक लगी। शुरुआती जांच में टीए शाखा में तैनात एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा और आरक्षक अभिषेक झारिया के नाम सामने आए। सत्यम शर्मा लंबे समय से फर्जी टीए बिल बनाकर राशि हड़प रहा था।
बिलों में आरक्षकों को जिले से बाहर ड्यूटी दिखाया जाता, जबकि वे वास्तविक रूप से जबलपुर में मौजूद रहते थे। भुगतान होने से पहले आने वाला ओटीपी भी सत्यम शर्मा द्वारा लिया जाता था। राशि का एक हिस्सा वह खुद और अपने सहयोगियों में बांट लेता था। घोटाला 2018-19 से चल रहा था। नवंबर 2025 में घोटाला सामने आया। अब तक लगभग 3 करोड़ रुपए की हेरा-फेरी हुई।
अभिषेक झारिया के बैंक खाते में 582 टीए बिलों के माध्यम से लगभग 55 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए जबकि उनकी 7 साल की सैलरी व एरियर केवल 26 लाख रुपए थे। एसएएफ में आरक्षकों का शुरुआती वेतन 23 से 25 हजार रुपए महीना होता है। कोष एवं लेखा आयुक्त के निर्देश पर जब स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल ने जांच की तो पता चला कि कुछ के बैंक खातों में उनकी सैलरी से 200 गुना ज्यादा रकम पड़ी है। 12 आरक्षकों के खातों में सिर्फ ज्।
बिल से 10 लाख रुपए से जमा मिले। स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की जांच में पता चला है कि 6वीं बटालियन एसएएफ रांझीए जबलपुर में यात्रा भत्ता देयकए चिकित्सा भत्ता देयक और एफवीसी देयकों से कर्मचारियों को अत्यधिक राशि का भुगतान किया गया है।
निलंबन के बाद हादसा. अभिषेक ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी-
टीए कांड खुलते ही सत्यम और अभिषेक दोनों सस्पेंड कर दिए गए। शर्म और दबाव में अभिषेक ने 12 नवंबर को ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। उधर सत्यम जांच शुरू होते ही गायब हो गया और फिर छिंदवाड़ा में उसकी शादी का कार्ड सामने आया। इसमें वेन्यू छिंदवाड़ा और डेट 22 नवंबर लिखी थी। शादी की जानकारी उसने विभाग को नहीं दी।
एक बैंक खाते में कई बार हुआ भुगतान-
सेल की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अभिषेक झारिया को लगभग 55 लाख रुपए का भुगतान 582 यात्रा भत्ता देयकों के माध्यम में किया गया। यह भुगतान 2018.19 से अब तक की अवधि में हुआ है, जबकि अब तक अभिषेक को वेतन और एरियर से 26 लाख रुपए का भुगतान हुआ हैए यानी टीए भत्ते से मिले रुपए वेतन की तुलना में लगभग 210 प्रतिशत अधिक हैं।











