भारत कृषक समाज महकौशल के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन-प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर कहा है कि जबलपुर जिले में यूरिया एवं डीएपी खाद की भारी कमी है। इस समय खरीफ की फसलों की बोनी चल रही है, किसान खाद के लिए बेहद परेशान हैं।
उन्होंने पत्र में कहा कि जबलपुर जिले में खाद के वितरण में बहुत अनियमित्ताएं हैं, अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा काला बाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, उर्वरक वितरण में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। जिला प्रशासन द्वारा नगद उर्वरक वितरण हेतु आन लायन टोकन प्रणाली की व्यवस्था की गई है। जिसमे किसानों को टोल फ्री नंबर 0761 181 पर बुकिंग हेतु कहा जा रहा है, यह सिस्टम ठीक कार्य नहीं कर रहा है, ऐसा लगता है की इसे केवल कुछ खास किसानों की मदद करने के लिए बनाया गया है।
केके अग्रवाल ने कहा कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। खाद बाजार में महंगे दामों में बिक रही हैँ। कुछ लोग इसका लाभ ले रहे हैं। इस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। इस प्रणाली में पहले तो आम किसान का फोन उठता ही नहीं और यदि कभी किसी का उठ भी गया तो उसका नंबर आने में कई दिन लगते हैँ।
वितरण केंद्रों से पहले से ही बुकिंग की जाकर खाद निकाल ली जाती है, आम किसान का नंबर ही नही आ पाता। इसमे प्रभावशाली, दबंग, और कुछ बड़े किसान ही लाभ ले पा रहे हैँ, उनको खाद का वितरण हो जाता है, आम और छोटे किसान भटकते रह जाते हैँ। इसकी जाँच की जाये तथा सिस्टम में तत्काल सुधार किया जाये और आम किसानों को खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाये।
केके अग्रवाल ने कहा कि जबलपुर जिले में खाद के साथ नेनो यूरिया एवं नेनो डीएपी की बॉटल किसानों को जबरजस्ती बोतलें थमाई जा रहीं हैँ। जो कि एफसीओ 1985 एवं उर्वरक संचलन आदेश तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 का स्पस्ट उलंघन है। एक्ट के अनुसार इस तरह की बाध्यता अवैधानिक है। ज्ञात हो कि अन्य राज्यों में इस बाध्यता को समाप्त किया जा चुका है। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा भी हाल ही में इस मामले को स्पष्ट कर विभाग को संज्ञान में लेने के लिए निर्देशित किया जा चुका है।











