Friday, February 13, 2026
Homeमध्य प्रदेशग्वालियर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने दिग्विजय सिंह को...

ग्वालियर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने दिग्विजय सिंह को बताया धोखेबाज

ग्वालियर , (हि.स.)।जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज ग्वालियर में आयोजित बोध पुस्तक विमोचन एवं लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए ।

इस अवसर पर उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के दिवंगत पिता स्वर्गीय हाकिम सिंह तोमर द्वारा रचित पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए उनके वक्तव्य ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में खासा ध्यान खींचा।

जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को “धोखेबाज” बताते हुए कहा कि वे दिव्यांगजनों के लिए चित्रकूट, मध्यप्रदेश में एक विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहते थे।

उनका उद्देश्य उन दिव्यांग लोगों को शिक्षा देना था, जिन्हें समाज अक्सर असफल मान लेता है, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने न तो विश्वविद्यालय की अनुमति दी और न ही जमीन उपलब्ध कराई।

उन्होंने कहा कि इस धोखे के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय स्थापित करना पड़ा, जहां आज बड़ी संख्या में दिव्यांग छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने मंच से कथित शंकराचार्यों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। राम जन्मभूमि आंदोलन के समय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में तथाकथित शंकराचार्यों ने न्यायालय जाने से मना कर दिया था।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब राम के कार्य के लिए हनुमान बंधन में आ सकते हैं, तो वे स्वयं राम के कार्य के लिए न्यायालय के कटघरे में खड़े क्यों नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि आज राम मंदिर निर्माण का परिणाम पूरे देश के सामने है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प पर बोलते हुए जगतगुरु रामभद्राचार्य ने समाज को आत्ममंथन की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज भी देश में लगभग 93 प्रतिशत लोग अपने कार्य को पूरी निष्ठा से नहीं करते।

यदि प्रत्येक नागरिक ईमानदारी और समर्पण के साथ अपना कार्य करने लगे, तो प्रधानमंत्री मोदी का 2047 का विकसित भारत का सपना 2037 में ही साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ज्ञान और साहित्य पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किताब और पुस्तक में बहुत बड़ा अंतर होता है। दोनों के बीच वही अंतर है, जो गटर और गंगा के बीच होता है।

Related Articles

Latest News