भाेपाल,(हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस का आराेप है कि यूरिया-डीएपी खरीदने वाले किसानों को जबरन खाद के लिक्विड फार्म 260 रुपए की नैनो यूरिया और 600 रुपए की नैनो डीएपी की आधा लीटर की बोतल खरीदनी पड़ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक अखबार में प्रकाशित समाचार के हवाले से आराेप लगाते हुए कहा है कि विरोध करने वाले किसानाें को व्यापारी खाद बेचने से ही इनकार करने लगे हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों का तर्क है कि कंपनी से ही जबरदस्ती पैकिंग (नैनो) खाद का बोझ डाला जाता है। इस पूरे मामले काे लेकर कमलनाथ ने सरकार काे घेरते हुए जमकर हमला बाेला है।
कमलनाथ ने मंगलवार काे साेशल मीडिया एक्स पर पाेस्ट कर कहा किसानों के साथ यह अन्याय आखिर कब तक चलेगा? पहले तो खेतों में जरूरी खाद की भारी कमी रही, किसान बार-बार दुकानों और सोसाइटियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन खाद नहीं मिली। अब जब थोड़ी बहुत खाद आई है, तो उसके साथ किसानों पर नई मुसीबत डाल दी गई है।
किसानों को जबरन 260 और 600 रुपये की नैनो खाद भी खरीदनी पड़ रही है। यानी जो किसान सिर्फ अपनी जरूरत की खाद लेना चाहता है, उसे कंपनी के दबाव में थोपे गए अतिरिक्त उत्पाद भी खरीदने पड़ रहे हैं।
पूर्व सीएम ने कहा कि कई व्यापारियों ने खुद माना है कि कंपनी उन पर भी दबाव बना रही है, इसलिए वे किसानों पर थोपने को मजबूर हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह मजबूरी क्यों है? सरकार किसानों की जेब काटकर कंपनियों को फायदा क्यों पहुंचा रही है?
कमलनाथ ने आराेप लगाते हुए कहा कि यह पूरा खेल केंद्र सरकार की सब्सिडी बचाने और निजी कंपनियों को फायदा देने का है। किसानों के लिए जो सस्ती खाद मिलनी चाहिए, उसके साथ अब अनचाहा बोझ जोड़ा जा रहा है। किसानों को राहत देने के बजाय उन पर नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
कमलनाथ ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार किसानों को परेशान करना बंद करे। किसान खाद लेने जाते हैं, कोई ऐश करने नहीं। उनके साथ जबरदस्ती, धमकी और लूट बंद होनी चाहिए। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि किसानों को उनकी जरूरत की खाद बिना किसी शर्त और मजबूरी के मिल सके। किसान इस देश की रीढ़ हैं, उन्हें बार-बार अपमानित और प्रताड़ित करना बंद होना चाहिए।











