भोपाल। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही लाडली बहना योजना पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खारिज की।
याचिकाकर्ता ने क्या मांगा था?
पारस सकलेचा ने याचिका में मांग की थी:
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हर लाभार्थी को मासिक 3,000 रुपए देने की शुरुआत तुरंत हो।
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नई लाभार्थियों का पंजीकरण फिर से शुरू किया जाए।
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पात्रता की न्यूनतम उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल की जाए, ताकि महिलाएं जीवनभर योजना का फायदा उठा सकें।
सकलेचा के वकील ने अदालत में कहा कि योजना अभी भी चल रही है, लेकिन 20 अगस्त 2023 से नई लाभार्थियों का पंजीकरण रोक दिया गया, जो ‘अवैध, मनमाना और भेदभावपूर्ण’ है।
सरकार की दलील
सरकार के वकील ने बताया कि योजना का क्रियान्वयन सरकार के नीतिगत फैसले के अनुसार किया जा रहा है। किसी भी महिला ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका नहीं लगाई है। इसलिए सरकार की नीति की जांच जनहित याचिका के आधार पर नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने इस बात का हवाला दिया कि नीतिगत फैसलों की न्यायिक समीक्षा के लिए अलग प्रक्रियाएं होती हैं और केवल पूर्व विधायक की याचिका के आधार पर कोई बदलाव करना उचित नहीं होगा।
हाई कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने कहा कि किसी नीतिगत फैसले की लागू होने की तारीख और जारी रहने का निर्णय सरकार के अधिकार में आता है।
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता न तो योजना के लाभार्थी हैं और न ही उन्होंने इसका फायदा लेने की इच्छा जताई, इसलिए मासिक सहायता राशि बढ़ाने की मांग पर विचार करना उचित नहीं होगा।
लाडली बहना योजना का महत्व
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योजना 2023 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू की गई थी।
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इस योजना के तहत 1.26 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की सहायता दी जा रही है।
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सरकार का कहना है कि वादे के अनुसार 3,000 रुपए मासिक राशि 2028 तक शुरू हो जाएगी।
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विश्लेषकों के अनुसार, इस योजना ने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।











