Friday, April 24, 2026
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खनन माफिया अमित खम्परिया ने फरारी के दौरान पुलिस को करता रहा गुमराह, नेपाल में होने की अफवाह उड़ाई

जबलपुर। एमपी के जबलपुर की पुलिस ने 3 साल से फरार डेढ़ लाख के इनामी खनन माफिया अमित खंपरिया को नागपुर से गिरफ्तार किया है। वह फरारी के दौरान अपने पिता अनिरुद्ध चतुर्वेदी के साथ किराए के अपॉर्टमेंट में रह रहा था। यहां तक कि पुलिस को गुमराह करने के लिए नेपाल में होने की अफवाह उड़ता रहा।

पुलिस अधिकारियों की माने तो शातिर बदमाश अमित खम्परिया ने फरारी के दौरान मुम्बई के एक बड़े अस्पताल में सर्वाइकल का इलाज कराया। वह पुलिस को गुमराह करने के लिए नेपाल भागने जाने की अफवाहें भी उड़ाता रहा। अधिकारियों का कहना है कि एक फोटो सामने आई है जिसमें वह दो-दो बंदूकधारियों के साथ नजर आ रहा है। शायद इसी कारण उससे डरकर लोगों ने शिकायतें नहीं की होगी।

अब उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है, ऐसे में और भी पीडि़त सामने आते हैं तो केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने अमित खम्परिया को न्यायालय में पेश कर तीन दिन का रिमांड लिया है। अमित खंपरिया पर उमरिया और सतना में कई आपराधिक मामले दर्ज हो गए थे। जिसके बाद वह जबलपुर आ गया।

पुलिस से बचने के लिए वह मामा का सरनेम लगाने लगा। जबलपुर में रहते हुए उसने अपने सारे दस्तावेज वोटर आईडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड भी इसी नाम से बनवा लिए। धीरे-धीरे लोग उसे अमित खंपरिया के नाम से ही जानने लगे। उमरियाए सतना में अपराध करने के बाद जब ये जबलपुर आया तो इसने 2010 में मारपीट की। जिसके बाद भेड़ाघाट थाने में इसके खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा का मामला दर्ज किया गया।

वर्ष 2010-11 में मंडला में दर्ज हुई थी एफआईआर-

बताया गया है कि अपने मामा के साथ रहते हुए अमित ने वर्ष 2010-11 में मंडला के खटिया क्षेत्र में स्थित इंद्री गांव के पास कन्हार नदी पर बने टोल का ठेका लिया था, जो कि कान्हा नेशनल पार्क को जोड़ती है।

अमित ने टोल ठेके में बैंक गारंटी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज पिता अनिरुद्ध प्रसाद सिंह चतुर्वेदी, मौसा रामजी द्विवेदी के नाम के लगाए थे। अमित और टोल ठेके पर मौजूद उसके गुर्गे कान्हा नेशनल पार्क जाने वाले पर्यटकों से तय राशि की बजाय तीन से चार गुना अधिक टोल टैक्स वसूलने लगे।

31 मई और 7 जून 2011 को उसके खिलाफ खटिया थाने में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पुलिस ने अमित खंपरिया के साथ पिता अनिरुद्ध प्रसाद, मौसा रामजी द्विवेदी, दशरथ प्रसाद तिवारी, गौरव माली, अनूप उर्फ अरुण जयसवाल, उमेश पांडे, मोनू दुबे को आरोपी बनाया था।

धोखाधड़ी के दोनों प्रकरणों में कोर्ट ने 22 सितंबर 2021 को 5-5 साल का कठोर कारावास व 1-1 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया था।

2018 में लड़ा था विधानसभा चुनाव-

करोड़ों रुपए की ठगी करने के बाद अमित खंपरिया ने वर्ष 2018 में जबलपुर में उत्तर-मध्य विधानसभा से चुनाव के लिए सर्व समाज कल्याण पार्टी के टिकट पर विधायक का चुनाव लडऩे के लिए नामांकन फार्म भरा। बाद में उसने भारतीय जनता पार्टी का समर्थन कर दिया। हालांकि उस वक्त भाजपा को भी यहां पर हार का सामना करना पड़ा।

गिरफ्तारी के बाद हाइकोर्ट से मिली जमानत-

खाधड़ी के इस मामले में मंडला पुलिस ने अमित खंपरिया के साथ उसके साथी गौरव माली, रज्जन ठाकुर, अमित पांडे, श्रीकांत शुक्ला, शनि ठाकुर, अजय बाल्मीकी की तलाश शुरू कर दी थी। 24 फरवरी 2022 को अमित खंपरिया को मंडला पुलिस ने कटनी-उमरिया मार्ग से गिरफ्तार किया था।

बाद में अमित खंपरिया के दिल में अचानक दर्द उठा। इलाज के लिए उसे मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में रहते हुए उसने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। मार्च 2022 के पहले सप्ताह में ही उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इसके बाद से अमित फरार था।

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