Saturday, July 25, 2026
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10 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी का संकट, D.El.Ed डिग्री पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में ओपन स्कूल के माध्यम से D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) करने वाले 10 हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहराता नजर आ रहा है। जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में इन शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से किया जा रहा है।

इसी दौरान उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दरअसल, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के नियमों के अनुसार D.El.Ed का न्यूनतम पाठ्यक्रम दो वर्ष का होना चाहिए। जबकि ओपन स्कूल के जरिए संचालित यह कोर्स 18 महीने का था। इसी वजह से अब इस डिग्री की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि शासन की ओर से स्पष्ट राहत नहीं मिलती, तो हजारों शिक्षकों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

2017 से 2019 के बीच हासिल की गई थी डिग्री

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 से 2019 के बीच बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने ओपन स्कूल के माध्यम से D.El.Ed की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद इन्हीं योग्यताओं के आधार पर प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चयन हुआ और कई अभ्यर्थियों की सरकारी स्कूलों में नियुक्ति भी हो गई।

हालांकि अब दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह मामला फिर सामने आया है। विभाग यह जांच कर रहा है कि संबंधित डिग्री NCTE के मानकों के अनुरूप है या नहीं। इसी कारण कई शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

NCTE के नियम बने विवाद की वजह

इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह NCTE का नियम है। परिषद के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों के लिए D.El.Ed का पाठ्यक्रम कम से कम दो साल का होना अनिवार्य है।

लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने ओपन स्कूल से यह कोर्स किया था, उनका प्रशिक्षण केवल 18 महीने का था। इसी आधार पर अब संबंधित डिग्री को मान्यता देने पर सवाल उठ रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई शिक्षकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

दस्तावेज सत्यापन से बढ़ी चिंता

प्रदेश के कई जिलों में नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। खंडवा सहित अन्य जिलों में यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सत्यापन के दौरान D.El.Ed की अवधि और उसकी मान्यता की जांच भी की जा रही है।

इसी कारण प्रभावित शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक चाहते हैं कि सरकार इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि उनकी नौकरी और सेवा संबंधी स्थिति साफ हो सके।

शासन के फैसले पर टिकी हैं उम्मीदें

फिलहाल इस मामले में अंतिम फैसला राज्य शासन के स्तर पर होना है। अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है। इसलिए प्रभावित शिक्षक लगातार शासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

यदि सरकार इस विषय में राहत देती है, तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, यदि NCTE के नियमों के आधार पर ही फैसला लिया जाता है, तो कई नियुक्तियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

हजारों शिक्षकों के भविष्य पर नजर

इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, तो दूसरी ओर विभाग नियमों के अनुरूप दस्तावेजों की जांच कर रहा है।

अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर है। शासन का निर्णय ही तय करेगा कि 18 माह के D.El.Ed पाठ्यक्रम वाले शिक्षकों की नियुक्ति बरकरार रहेगी या फिर इस मामले में कोई नई व्यवस्था लागू की जाएगी। तब तक प्रदेशभर के हजारों शिक्षक अनिश्चितता के माहौल में अपने भविष्य को लेकर चिंतित बने हुए हैं।

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