शहडोल. एमपी के शहडोल जिला अस्पताल के लेबर रूम से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्वास्थ्य विभाग के सुरक्षित प्रसव के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जयसिंहनगर के ग्राम सेमरा निवासी उमा साकेत के साथ हुई इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ली, बल्कि अस्पताल के भीतर मरीजों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ का तर्क सवालों के घेरे में है। उन्होंने टेबल टूटने की बात को सिरे से नकारते हुए कहा कि महिला का वजन अधिक होने के कारण संतुलन बिगड़ा और बच्चा आड़ा होने के कारण उसकी मौत हुई।
नहीं थी अतिरिक्त सुरक्षा
प्रबंधन की इस दलील पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महिला का वजन अधिक था, तो मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत अतिरिक्त सुरक्षा क्यों नहीं बरती गई। क्या टेबल इतनी कमजोर थी कि मरीज का भार भी नहीं सह सकी।
रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप
पीडि़त उमा साकेत को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पति मुकेश साकेत का आरोप है कि जब उमा को लेबर रूम में टेबल पर लिटाया गया, तो वह जर्जर टेबल अचानक टूट गई।
इस झटके से उमा और गर्भस्थ शिशु सीधे जमीन पर जा गिरे। परिजनों का कहना है कि इसी हादसे के कारण नवजात की मौत हुई है।
पीएनसी वार्ड में उपचाररत उमा साकेत ने स्वयं इस भयावह अनुभव की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वह टेबल टूटने की वजह से नीचे गिरी थीं।
गंभीर बात यह है कि घटना के बाद स्टाफ ने संवेदनहीनता दिखाते हुए परिजनों को मिलने तक नहीं दिया और सीधे मृत बच्या पैदा हुआ है कहकर मामला दबाने की कोशिश की।











