जबलपुर, । मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत उत्पादन के साथ फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल और अधिकतम उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह से फ्लाई ऐश की 250वीं रेल रेक गत दिवस 16 सितंबर को रवाना की गई। अगस्त 2023 में रेल मार्ग से फ्लाई ऐश परिवहन की शुरुआत के बाद अब तक 250 रेक के माध्यम से करीब 6.30 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन एवं निष्पादन किया जा चुका है।
MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने बताया कि ताप विद्युत गृहों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए कंपनी लगातार नए विकल्प विकसित कर रही है। रेल मार्ग से बड़े पैमाने पर ऐश परिवहन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे फ्लाई ऐश को विभिन्न औद्योगिक एवं अधोसंरचना कार्यों तक पहुंचाने में गति मिली है और इसके उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
रेल परिवहन से बढ़ा ऐश निष्पादन-संजय गांधी ताप विद्युत गृह के कार्यपालक निदेशक एच.के. त्रिपाठी ने बताया कि फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप ऐश निष्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 16,29,822 मीट्रिक टन (84.19 प्रतिशत), वर्ष 2024-25 में 18,02,990 मीट्रिक टन (94.39 प्रतिशत) तथा वर्ष 2025-26 में 31,43,899 मीट्रिक टन (184.96 प्रतिशत) फ्लाई ऐश का निष्पादन किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 तक 5.77 लाख मीट्रिक टन (72.90 प्रतिशत) फ्लाई ऐश का निष्पादन एवं उपयोग किया जा चुका है। ऐश के परिवहन के लिए रेल मार्ग के साथ-साथ अन्य माध्यमों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सीमेंट से सड़क निर्माण तक उपयोग-MPPGCL द्वारा अपने सभी ताप विद्युत गृहों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। संजय गांधी ताप विद्युत गृह में 210 मेगावाट एवं 500 मेगावाट क्षमता के साइलो से ड्राई फ्लाई ऐश सीमेंट उद्योग, ईंट निर्माण, सड़क निर्माण सहित अन्य अनुमन्य उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है। अधिक मात्रा में ऐश उठाव सुनिश्चित करने के लिए Expression of Interest (EOI) और ई-नीलामी के माध्यम से फ्लाई ऐश उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) तथा अन्य संभावित उपयोगकर्ताओं को फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उपलब्ध फ्लाई ऐश और उसके उपयोग की संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
पॉन्ड ऐश प्रबंधन के लिए नई व्यवस्थाएं-कंपनी के डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने बताया कि फ्लाई ऐश के नियंत्रित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए संजय गांधी ताप विद्युत गृह के ऐश डाइक-II में Pond Ash Conveying System, डी-वाटरिंग एवं रीसाइक्लिंग व्यवस्था स्थापित की जा रही है। इससे पॉण्ड ऐश के वैज्ञानिक प्रबंधन और उसके पुनः उपयोग को गति मिलने की संभावना है। साइलो क्षेत्र में नवनिर्मित चार वे-ब्रिज के माध्यम से फ्लाई ऐश के उठाव एवं परिवहन की मात्रा की निगरानी तथा उसके पारदर्शी रिकॉर्डिंग सिस्टम को भी मजबूत किया गया है। इससे ऐश के परिवहन की मात्रा का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी।
सड़क निर्माण और माइन बैकफिलिंग में उपयोग की तैयारी-भविष्य में पॉण्ड ऐश के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए विभिन्न संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इनमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड (MPRDC) के सड़क निर्माण एवं अन्य अधोसंरचना कार्यों में पॉण्ड ऐश के उपयोग के प्रस्ताव शामिल हैं। इन पहलों के क्रियान्वयन से पॉण्ड ऐश के उपयोग और निष्पादन में वृद्धि की संभावना है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर पॉण्ड ऐश के निष्पादन के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की खदानों में mine void backfilling के लिए ऐश आवंटन प्राप्त करने की कार्यवाही भी की जा रही है।
ऐश को अपशिष्ट नहीं, संसाधन बनाने की दिशा-MPPGCL के इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य फ्लाई ऐश को केवल विद्युत उत्पादन से निकलने वाले अवशेष के रूप में न देखते हुए एक उपयोगी औद्योगिक एवं निर्माण संसाधन के रूप में अधिकतम स्तर पर पुनः उपयोग में लाना है। कंपनी द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) तथा विद्युत मंत्रालय (MoP) द्वारा निर्धारित 100 प्रतिशत ऐश उपयोगिता के लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। संजय गांधी ताप विद्युत गृह से फ्लाई ऐश की 250वीं रेल रेक का रवाना होना इसी सतत प्रयास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।








