राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के उद्देश्य से जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा तैयार किये गये नये सेटअप के अंतर्गत जिले के सभी राजस्व न्यायालय मंगलवार 22 जुलाई से पूर्णकालिक न्यायिक कार्य करना प्रारंभ कर देंगे। नये सेटअप में जिले में राजस्व न्यायालयीन एवं गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये अलग-अलग राजस्व अधिकारियों को नियुक्त किया गया है और राजस्व न्यायालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है।
कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देशानुसार पहले दिन 22 जुलाई को सभी तहसील एवं उप तहसील न्यायालयों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं एवं मीडियाकर्मियों को आमंत्रित कर नये सेटअप से अवगत कराया जायेगा तथा इसके कामकाज के बारे में जानकारी दी जायेगी। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों, पक्षकारों एवं अधिवक्ताओं से राजस्व न्यायालयों के कामकाज को और बेहतर बनाने सुझाव भी प्राप्त किये जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर दीपक सक्सेना ने 17 जुलाई को आदेश जारी कर जबलपुर जिले में राजस्व न्यायालयीन कार्यों एवं गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये अलग-अलग राजस्व अधिकारियों को नियुक्त किया है। नये सेटअप में जिले में राजस्व न्यायालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है तथा कटंगी, पौडा, बरगी, बरेला, बेलखेड़ा और चरगवां जैसे उप तहसील न्यायालयों में भी पूर्णकालिक पीठासीन अधिकारियों की पदस्थापना की गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि न्यायालयीन कार्यों के लिये नियुक्त तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार केवल न्यायालयीन कार्य ही करेंगे। इन अधिकारियों की ड्यूटी गैर न्यायालयीन कार्यों में नहीं लगाई जा सकेगी। इन्हें केवल विशेष परिस्थितियों में तथा गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये नियुक्त राजस्व अधिकारियों की अनुपस्थिति में आवश्यकता होने पर ही जिला दंडाधिकारी की बिना लिखित अनुमति से गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये ड्यूटी लगाई जा सकेगी। जबकि गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये नियुक्त राजस्व अधिकारी कानून व्यवस्था, व्हीआईपी ड्यूटी, प्रोटोकॉल आदि का कार्य ही देखेंगे।
कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा तय निर्धारित नई व्यवस्था में न्यायालयीन कार्यों के लिये नियुक्त अधिकारियों को कार्य दिवसों में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अपने न्यायालय में उपस्थित रहकर न्यायालयीन कार्य संपादित करने होंगे। उन्हें अपनी उपस्थिति आरसीएमएस के माध्यम से इ-पंचिंग मॉड्यूल पर दर्ज करानी होगी। राजस्व न्यायालयीन कार्यों और गैर न्यायालयीन कार्यों के लिये अलग-अलग राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की इस नई व्यवस्था के तहत सभी राजस्व न्यायालयों को सीसीटीवी कैमरे से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि इनकी मॉनिटरिंग को सुदृढ किया जा सके।










