जबलपुर। देश के सभी श्रम संगठनों द्वारा श्रम- विरोधी, नियोक्ता – समर्थक नई चार श्रम संहिताओं के विरोध में आज काला दिवस मनाकर विरोध किया गया है। मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि नई चार श्रम संहिताएं देश के श्रमिकों जो संपत्ति के वास्तविक सृजनकर्ता है उन्हें फिर औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेलने का प्रयास है।
श्री पाठक ने कहा कि इनमें ऐसे कठोर और दमनकारी प्रावधान है, जिससे यूनियन बनाना अब कठिन, पंजीकरण मुश्किल और निरस्तीकरण आसान हो जाएगा। कार्य समय-सीमा को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे उसे मनमाने ढंग से बढ़ाया जा सके। फिक्स्ड टर्म रोजगार को सामान्य बनाया जा रहा है, मौजूदा सामाजिक सुरक्षा कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है।
17 क्षेत्रीय श्रम कानूनों को समाप्त कर बड़ी संख्या में श्रमिकों का व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। न्यूनतम वेतन कानून को कमजोर किया जा रहा है। राकेश डी पी पाठक ने कहा कि इन चार नई श्रम संहिताओं से श्रमिकों, कार्मिकों का हित संवर्धन नहीं बल्कि उत्पीडऩ होगा।
वहीं प्रशासन , प्रबंधन और उघोग पतियो का हित संवर्धन होगा। मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने इनके विरोध में काला दिवस मनाया जिसमें फेडरेशन के साथी गण,कर्मचारी गण उपस्थित थे।
राकेश पाठक ने कहा कि पहले सरकार उघोगपतियो के साथ श्रमिकों का विशेष ध्यान रखकर कानून बनातीं थी, अब नहीं।इन श्रम संहिताओं ने मालिक और पूंजी के पक्ष में संतुलन को और झुका दिया है। श्रमिकों, कार्मिकों की छंटनी और लॉक आउट को आसान बना दिया है।
आज जब काम, नौकरी पहले से अधिक असुरक्षित, अनुबंध आधारित और असंगठित हो चुका है तब सरलीकरण का अर्थ उघोगपतियो को यह अधिकार दे देना वे जब चाहें मजदूरों को निकाल बाहर कर सकते हैं। क्योंकि पहले 44 कानून मजदूरों, कार्मिकों को अलग-अलग सुरक्षा प्रदान करते थे।
आज बिजली बिजली सेक्टर में 15 सालों से भी ज्यादा समय से संविदा, कर्मचारी और आउट सोर्स कर्मचारी गण नियमित होने की बाट जोहते हुए अपनी आधी सेवा आयु पूर्ण कर चुके हैं। अभी भी उनका भविष्य अंधकारमय है। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि सरकार इन श्रम संहिताओं को वापस ले और बिजली सेक्टर की सभी कंपनियों में 15 बर्षो से कार्यरत कार्यरत सभी संविदा कर्मियों और आउट सोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त नियमित किया जाए।
पुरानी पेंशन बहाल की जाएं। वहीं पेंशन प्राप्त कर रहे सभी श्रेणी के पेंशनरों की पेंशन की सुरक्षा की गारंटी राज्य और केंद्र सरकार अनिवार्य रूप से लें। मध्यप्रदेश में नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स को भी महंगाई राहत, परिवार पेंशन राहत दी जाएं। राज्य बंटवारे की धारा 49 को समाप्त किया जाए।
यह धारा बर्ष 2000 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर लागू नहीं होती है किन्तु राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों की मनमानी से लाखों पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं और उनका आर्थिक शोषण हो रहा है।
यह तत्काल बंद होना चाहिए। मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक, यू के पाठक,दिनेश दुबे, अनूप वर्मा,उमाशंकर दुबे,अवनीश तिवारी, राजेश मिश्रा,रवि चौबे, श्रीकांत दुबे, डी के चतुर्वेदी,अजय चौबे, योगेश पटेल,मोहित पटेल, मनोज पाठक,दिलीप पाठक, संजय सिंह,अक्षय श्रीवास्तव, बी एम तिवारी, एस के यादव, आर के वर्मा, ए के दुबे, एस के शर्मा, ए के पांडे सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के साथियों, कर्मचारी गणों ने इस काले कानून का विरोध किया।










