PM Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। सोमवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लोगों से कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश को ऊर्जा बचत और संसाधनों के सही उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा। पीएम मोदी ने लोगों से वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लास, विदेश यात्राओं में कमी और सोने की खरीद कम करने जैसे उपाय अपनाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक बार फिर कोविड-19 महामारी की तरह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन सिस्टम का दौर लौट सकता है।
PM Narendra Modi फिर लौट सकता है Work From Home कल्चर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने तकनीक का शानदार उपयोग किया था। उस समय ऑनलाइन क्लास, वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं ने देश को चलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि अब भी उसी तरह तकनीक का उपयोग कर ईंधन की खपत कम की जा सकती है। पीएम मोदी ने निजी और सरकारी संस्थानों से डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देने की अपील की।
उनकी इस अपील के बाद ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कई बड़ी कंपनियां फिर से अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम मॉडल लागू कर सकती हैं। खासकर आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
PM Narendra Modi स्कूलों से भी की ऑनलाइन क्लास की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे कुछ स्कूलों से ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था पर काम करने का आग्रह करेंगे। उनका मानना है कि यदि कुछ समय के लिए ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाए तो लाखों वाहनों का उपयोग कम होगा और ईंधन की बड़ी बचत हो सकती है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह व्यवस्था कितने समय के लिए लागू हो सकती है, लेकिन उनके बयान के बाद शिक्षा क्षेत्र में भी हलचल बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन संकट और गहराया तो बड़े शहरों में ऑनलाइन शिक्षा और हाइब्रिड मॉडल फिर से चर्चा में आ सकते हैं।
PM Narendra Modi पश्चिम एशिया संकट को बताया गंभीर
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को पिछले एक दशक का सबसे गंभीर संकट बताया। उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

उन्होंने भरोसा जताया कि जिस तरह भारत ने कोविड महामारी जैसी चुनौती का सामना किया था, उसी तरह देश इस संकट से भी मजबूती के साथ बाहर निकलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन ऊर्जा और संसाधनों के उपयोग में सतर्कता बरतनी होगी।
PM Narendra Modi क्यों बढ़ रही है चिंता
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आने से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसका असर लगभग हर सेक्टर पर दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
PM Narendra Modi FMCG सेक्टर पर भी बढ़ा दबाव
तेल की कीमतों में तेजी का असर अब FMCG सेक्टर पर भी दिखने लगा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बढ़ते फ्रेट और ईंधन खर्च के कारण कंपनियों की लागत लगातार बढ़ रही है।
प्लास्टिक, लैमिनेट और अन्य क्रूड आधारित पैकेजिंग सामग्री महंगी हो रही है, जिससे कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।
ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा के उपयोग वाले उत्पाद महंगे हो सकते हैं। कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं ताकि बढ़ती लागत की भरपाई की जा सके।
PM Narendra Modi सोने की खरीद कम करने की अपील पर विवाद
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोने की खरीद कम करने की अपील के बाद ज्वेलरी उद्योग से जुड़े लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की है। ज्वेलरी उद्योग के प्रतिनिधि पच्छीगर का कहना है कि यदि सोने की खरीद पर सख्ती बढ़ाई गई तो इससे लाखों श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश में ज्वेलरी सेक्टर से करीब 1.5 लाख से 2 लाख लोग जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे रोजगार पर असर न पड़े और उद्योग भी चलता रहे।

PM Narendra Modi PMO को भेजे जाएंगे सुझाव
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय को अपने सुझाव भेजेंगे। उनका कहना है कि बुलियन आयात पर नियंत्रण जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, बजाय इसके कि सीधे सोने की खरीद को हतोत्साहित किया जाए।
उद्योग जगत चाहता है कि सरकार ऐसा संतुलन बनाए जिससे विदेशी मुद्रा की बचत भी हो और रोजगार पर असर भी कम पड़े।
PM Narendra Modi तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर रह सकती हैं
अमेरिकी वित्तीय संस्था JPMorgan Chase & Co. ने अनुमान जताया है कि इस साल वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं।
संस्था के मुताबिक भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगले महीने तक फिर से खुल जाए, लेकिन तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बना रहेगा और तेल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।
PM Narendra Modi आम लोगों पर क्या होगा असर
यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो इसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ेगा और इसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आने

वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है। यही कारण है कि सरकार अभी से ऊर्जा बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि देश के 140 करोड़ लोग छोटे-छोटे प्रयास करें तो बड़ी चुनौती का मुकाबला आसानी से किया जा सकता है।











