Sunday, September 6, 2026
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वायरल इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, कोर्ट ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस उसे दिल्ली लेकर आई, जहां शनिवार को अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मामला उस वक्त फिर चर्चा में आया, जब एक पॉडकास्ट का वीडियो सामने आया, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारी के पिता की खोपड़ी फोड़ने का दावा किया था। वीडियो वायरल होने के बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी।

पुलिस अब कथित मारपीट की घटना के साथ-साथ भारद्वाज के बाद में दिए गए बयानों और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी से जुड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। वहीं, एक नाबालिग कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न से संबंधित अलग मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था. इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया. रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई उस समय हुई, जब जंतर-मंतर से जुड़े मामले में उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन और दबाव बढ़ रहा था. शनिवार को उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की गई और फिर उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया.

भारद्वाज पर आरोप है कि उसने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान संजय आजाद के साथ मारपीट की. संजय आजाद छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता बताए गए हैं. घटना के बाद मामले को लेकर विवाद बढ़ा और सोशल मीडिया पर सामने आए भारद्वाज के कथित बयान ने पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया.

पॉडकास्ट के बाद बढ़ा विवाद

मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ उस समय आया, जब भारद्वाज का एक पॉडकास्ट सामने आया. इसमें वह कथित तौर पर संजय आजाद पर हमले का जिक्र करते हुए उनकी खोपड़ी फोड़ने की बात कहता सुनाई दिया. इसी बयान के बाद घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हो गई.

भारद्वाज ने अपने बचाव में अलग-अलग बयानों में घटना को आत्मरक्षा से जोड़ने की बात कही है. एक रिपोर्ट के अनुसार उसने दावा किया था कि यदि उसने आत्मरक्षा में कार्रवाई नहीं की होती तो स्थिति उसके लिए गंभीर हो सकती थी. इसलिए पुलिस जांच में घटना के दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध वीडियो सामग्री को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत दी

गिरफ्तारी के बाद भारद्वाज को शनिवार को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत के समक्ष पेश किया गया. सुरक्षा कारणों को देखते हुए उसे कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में न्यायाधीश के आवास पर पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है. अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

पुलिस हिरासत मिलने के बाद जांच एजेंसी के पास आरोपी से घटना से जुड़े तथ्यों पर पूछताछ करने का अवसर होगा. पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, मारपीट की स्थिति कैसे बनी और कथित हमले में कौन-कौन लोग शामिल थे. इसके साथ ही बाद में दिए गए सोशल मीडिया और पॉडकास्ट बयानों की भी जांच की जा रही है.

मामले में बढ़ाई गई कानूनी धाराएं

भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामले में बाद में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है. इससे मामले की कानूनी गंभीरता बढ़ गई है.

इसके अलावा नाबालिग कार्यकर्ता की ओर से ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न के आरोपों को लेकर पॉक्सो अधिनियम के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है. पुलिस अब दोनों मामलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और शिकायतों की जांच कर रही है.

प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी की मांग की थी

भारद्वाज की गिरफ्तारी से पहले कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारियों और समर्थकों ने दिल्ली में पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया था. प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की थी. गिरफ्तारी के बाद भी उसके समर्थकों की ओर से पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई.

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जंतर-मंतर की घटना में गंभीर चोट पहुंचाने के बावजूद भारद्वाज के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं हुई. इसी बीच उसके पॉडकास्ट में किए गए कथित दावे ने विवाद को और बढ़ा दिया. पुलिस ने बाद में मामले में कार्रवाई तेज की और उसे बुलंदशहर से हिरासत में लिया.

सोशल मीडिया बयान जांच का अहम हिस्सा

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया और डिजिटल सामग्री भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है. भारद्वाज के कथित पॉडकास्ट बयान के अलावा सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्ट और वीडियो की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के बाद आरोपी ने क्या-क्या बयान दिए और उनका मामले की जांच पर क्या प्रभाव पड़ा.

पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया पर सामने आए दावों और जंतर-मंतर पर हुई वास्तविक घटना के बीच क्या संबंध है. जांच एजेंसी घटना के प्रत्यक्षदर्शियों, शिकायतकर्ता के बयान और उपलब्ध वीडियो सामग्री के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है.

राजनीतिक संरक्षण के दावे से भी विवाद
विवाद उस समय और बढ़ गया जब भारद्वाज के पॉडकास्ट में कथित तौर पर यह दावा सामने आया कि उसे जेल नहीं जाना पड़ा और कुछ राजनीतिक नेताओं को उसने अपने बड़े भाई जैसा बताया. इन दावों के बाद राजनीतिक संरक्षण के आरोपों को लेकर भी सवाल उठे. हालांकि दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक प्रभाव के दावों को लेकर अलग से स्पष्टीकरण दिया है.

भारद्वाज के इन कथित दावों की भी जांच की जा रही है. इस मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि उसने जिन राजनीतिक संबंधों का उल्लेख किया, उनका घटना अथवा पुलिस कार्रवाई से वास्तव में कोई संबंध था या नहीं.

अब पुलिस जांच पर टिकी नजर

स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत मिलने के बाद अब जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है. पुलिस कथित मारपीट की घटना के साथ-साथ उसके बाद सामने आए बयानों, डिजिटल सामग्री और शिकायतों की कड़ियों को जोड़ रही है. मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.

फिलहाल अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है और मामले की जांच जारी है. आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. पुलिस की अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों से मामले में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं.

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