Friday, April 24, 2026
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एमपी में विश्वसनीय और पर्याप्त बिजली की उपलब्धता के लिए प्राथमिकता से लागू करेंगे रिसोर्स एडीक्वेसी प्लान: ऊर्जा मंत्री

रिसोर्स एडीक्वेसी प्लान से बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर 24 घण्टे विश्वसनीय और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। गत वर्ष सितम्बर और अक्टूबर में पूरे देश में विद्युत आपूर्ति में कठिनाई हो रही थी। उम्मीद है इस प्लान के क्रियान्वयन के बाद भविष्य में ऐसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात भोपाल में केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा “रिसोर्स एडीक्वेसी-नीड एण्ड वे फारवर्ड” विषय पर पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों की कार्यशाला में कही। ऊर्जा मंत्री कार्यशाला में वर्चुअली जुड़े। 

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस प्लान से बिजली की आवश्यकताओं का आकलन बेहतर ढ़ंग से हो सकेगा। मध्यप्रदेश इसे प्राथमिकता से लागू करेगा। श्री तोमर ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को 24 घण्टे और कृषि के लिए 10 घण्टे बिजली उपलब्ध करवा रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि भोपाल में आयोजित पश्चिम क्षेत्र के राज्यों की कार्यशाला के सार्थक परिणाम सामने आयेंगे। साथ ही पारम्परिक और गैर पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

मध्यप्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट

अध्यक्ष केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण व पदेन सचिव केन्द्र सरकार घनश्याम प्रसाद ने कहा कि रिसोर्स एडीक्वेसी प्लान लागू होने के बाद देश में जहाँ भी बिजली सरप्लस होगी, उसे वहाँ दिया जा सकेगा, जहाँ बिजली की कमी होगी। इसके दिशा-निर्देश तैयार किये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मध्यप्रदेश, असम, उड़ीसा, तमिलनाडु और पंजाब में कार्य किया जा रहा है। इसे मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जायेगा। 

संसाधन पर्याप्तता योजना (रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान) राज्य वितरण कंपनियों के लिए उत्पादन क्षमता के अधिकतम उपयोग, बिजली की मांग से जुड़ी विविधता का उपयोग करने और विभिन्न राज्यों के बीच उत्पादन परिसंपत्तियों को साझा करने के लिए फायदेमंद होगी। यह योजना राज्यों को अधिकतम क्षमता नियोजन और बिजली की खरीद में भी मदद करेगी। इससे उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की लागत कम हो जाएगी।

प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे ने मध्यप्रदेश में लागू पावर बैंकिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हर 15 मिनट में बिजली की आवश्यकता का आकलन करते हैं। अब सोलर, विण्ड, गैस, थर्मल, हाइड्रो सभी संसाधनों में मैचिंग कर पीक आवर्स में भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोलर और विण्ड एनर्जी में परिवर्तनशीलता अधिक है। यह दिन में पर्याप्त उपलब्ध होगी, लेकिन रात में कम हो जायगी। इस कमी को मीटआऊट करने के लिए अन्य संसाधनों से बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इन्हीं उद्देश्यों के संबंध में चर्चा और नीति बनाने के लिए कार्यशाला की गयी है। 

प्रबंध संचालक एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी विवेक पोरवाल ने चर्चा में भाग लेते हुए रिसोर्स एडीक्वेसी प्लान और पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता सहित विभिन्न पहलुओं पर अपनी बातें रखीं। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दमन दीव के अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

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