Friday, September 11, 2026
Homeसाहित्यनारी- प्रीति वर्मा

नारी- प्रीति वर्मा

कभी बेटी, कभी बहन, कभी माँ,
कभी दादी, कभी नानी
हैं नारी के रूप अनेक
हर रिश्ते को अपनाती है
हर रिश्ते को निभाती है
ऐसी है यह नारी

कभी राखी का स्नेह
कभी माँ वकी ममता का आंचल
कभी दादी-नानी की कहानियां
हर रिश्ते को प्रेम से बांधा
ऐसी है यह नारी

पुरषों की भीड़ पर अकेली भारी पड़ी
सृष्टि को जलाकर राख कर दे
ऐसी हैं यह चिंगारी
हैं यह नारी

जिस ने रक्त से सींच कर
नौ माह कोख में
दर्द सह गई हँसते-हँसते
ऐसी है यह नारी

बेटी- पिता की राजकुमारी
बहन- भाई की दुलारी
माँ- सन्तान का स्नेह
पत्नी- पति का प्रेम
जिस के बिना पुरुष भी अहसहाय
ऐसी हैं यह नारी

जिसके बिना सृष्टि हैं अधूरी
तो सम्पूर्ण है नारी
ऐसी है यह नारी
गर्भ में ही मारोगे,
तो कहां है यह नारी
ऐसी अनमोल है नारी
ऐसी अनमोल है नारी

-प्रीति वर्मा

Related Articles

Latest News