मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला संयोजक अटल उपाध्याय ने बताया है कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए घोषित मुख्यमंत्री चिकित्सा बीमा योजना (MPEHIS) लागू नहीं होने के कारण कर्मचारी अपना एवं अपने परिजनों का इलाज शासकीय खर्चे पर प्राइवेट अस्पतालों में नहीं करा पा रहा है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र सिंह द्वारा मध्य प्रदेश शासन के मुख्य मंत्री को एक मांग पत्र प्रेषित कर इस योजना का लाभ प्रदेश के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को देने की मांग की है, पत्र में योजना लागू करने में प्रतिमाह कुछ अंशदान देने के संबध में भी स्वीकृति दी गई है।
बताया गया है कि 4 जनवरी 2020 को मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री चिकित्सा बीमा योजना को मंजूरी दी थी,लेकिन आदेश आज चार वर्ष पश्चात भी जारी नहीं किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि 4 जनवरी 2020 को मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद ने इस योजना को मंजूरी दी थी, प्रत्येक कार्यालय में शासकीय सेवकों और उसके परिजनों की संपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा चुकी है। योजना में अधिकारियों और कर्मचारियों के अंशदान की जानकारी भी शामिल थी, लेकिन बीमा योजना को लागू करने के संबंध में आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे योजना का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
कोरोना काल के बाद कर्मचारी अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। वर्तमान में चिकित्सा प्रतिपूर्ति नियमों के तहत कर्मचारी को खर्च का सिर्फ 20-30% ही वापस मिलता है। आवंटन उपलब्ध ना होने के कारण सम्बन्धित कार्यालयों द्वारा लंबे समय तक चिकित्सा देयकों का भुगतान नहीं किया जाता, यदि कर्मचारी खुद से बीमा कराता है, तो उसे प्रत्येक वर्ष 25 से 30 हजार रुपए तक स्वास्थ बीमा योजना चलाने वाली कंपनी को देना पड़ते हैं।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला संयोजक अटल उपाध्याय, सह संयोजक नरेश शुक्ला, आलोक अग्निहोत्री, देवेंद्र पचौरी, विनय नामदेव, अजय दुबे, रजनीश पांडे, शहजाद सिंह द्विवेदी, नेतराम झरिया, पासी, श्रीमति मनीषा उपाध्याय, कीर्ति चौहान, सुश्री कविता येंडे, स्वाति इंदु रख्या ने मुख्यमंत्री चिकित्सा बीमा योजना का लाभ समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिए जाने की मांग की है। जिससे कर्मचारियों के बुजुर्ग माता-पिता का इलाज भी शासकीय व्यय पर प्राइवेट अस्पताल में करा सकेंगे।










