पुराना महंगा है, नया सस्ता है
देख लो खरीदकर क्या सस्ता है
थकान की नींद बड़ी कीमती है
ख़्वाबे-पलक पर मृगया सस्ता है
देखो बाज़ार में सौदा करने चले
रूह महंगा जिस्मे-सया सस्ता है
कितने देर लग गयी घर लौटते
आया बेहवास जो गया सस्ता है
‘उड़ता’ लाचार हूँ अया’ सस्ता है
रोटी नहीं मुमकिन तया सस्ता है
सुरेंद्र सैनी बवानीवाल ‘उड़ता’
झज्जर, हरियाणा- 124103
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