Saturday, August 1, 2026
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युवराज सिंह का बड़ा खुलासा, संन्यास की असली वजह, समर्थन और सम्मान की कमी ने तोड़ा मनोबल

नई दिल्ली: दिग्गज भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह ने जून 2019 में क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। उस साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह न मिलने के बाद युवराज ने आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दोनों को अलविदा कह दिया था।

अब करीब सात साल बाद युवराज सिंह ने अपने संन्यास को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है।


संन्यास के पीछे की असली वजह

समर्थन और सम्मान की कमी ने तोड़ा मनोबल

44 वर्षीय युवराज सिंह ने कहा कि उन्हें क्रिकेट खेलते हुए अब खुशी महसूस नहीं हो रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि उनके फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें न तो अपने आसपास पूरा समर्थन मिल रहा था और न ही वह सम्मान, जिसके वे हकदार थे।

पूर्व भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ हाल ही में हुए एक पॉडकास्ट में युवराज ने अपने मन की बात खुलकर रखी।


“जब खुशी ही नहीं थी, तो खेलने का क्या मतलब?”

युवराज के शब्दों में दर्द युवराज ने कहा, “मुझे अपने खेल में मजा नहीं आ रहा था। मेरे मन में बार-बार यह सवाल आता था कि जब मुझे क्रिकेट खेलने में खुशी ही नहीं मिल रही, तो मैं इसे क्यों खेल रहा हूं? मुझे लगता था कि न तो मुझे टीम का साथ मिल रहा है और न ही इज्जत। जब ये दोनों चीजें नहीं होतीं, तो खेलने का क्या मतलब रह जाता है?”

उन्होंने आगे कहा, “मैं खुद से पूछता था कि मैं आखिर किस बात को साबित करना चाहता हूं? मानसिक और शारीरिक रूप से मैं इससे ज्यादा नहीं कर सकता था और यह सब मुझे अंदर से तोड़ रहा था। जिस दिन मैंने खेल छोड़ दिया, उस दिन मुझे फिर से खुद जैसा महसूस हुआ।”


बचपन की यादें और पुराने जख्म

प्रतिभा पर उठे थे सवाल युवराज सिंह ने अपने जीवन के एक पुराने दौर को भी याद किया, जब उनकी प्रतिभा पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने बताया,

“अब जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि उस इंसान के पास मुझे ठीक से देखने का समय ही नहीं था। शायद वह मेरे पिता से अच्छा व्यवहार कर रहा था। उस वक्त वह खुद भारत के लिए खेल रहा था, इसलिए उसने ऐसा कहा होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि उस समय वह सिर्फ 13–14 साल के थे और खेल को समझ ही रहे थे।

“मैंने इसे दिल पर नहीं लिया, लेकिन मेरे पिता ने इसे बहुत गंभीरता से लिया था।”


एक सच्चा मैच विनर, भारतीय क्रिकेट का स्वर्णिम अध्याय

युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के महान ऑलराउंडर्स में गिने जाते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में खुद को एक बड़े मैच विनर के रूप में साबित किया। गेंद और बल्ले दोनों से उन्होंने कई बार विरोधी टीमों को अकेले दम पर ध्वस्त किया।

भारत की 2011 वर्ल्ड कप जीत में युवराज सिंह की भूमिका ऐतिहासिक रही, जहां उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।


युवराज सिंह का अंतरराष्ट्रीय करियर

आंकड़ों में युवराज की महानता

  • वनडे: 304 मैच | 8701 रन | 14 शतक | 52 अर्धशतक | 111 विकेट

  • टेस्ट: 40 मैच | 1900 रन | 9 विकेट

  • टी20 इंटरनेशनल: 58 मैच | 1100+ रन | 28 विकेट


संन्यास के बाद सुकून

“खेल छोड़ा, तो खुद को फिर पाया”

युवराज सिंह का यह खुलासा बताता है कि सफलता और शोहरत के बावजूद एक खिलाड़ी के लिए मानसिक संतुलन और सम्मान कितने जरूरी होते हैं। मैदान से विदाई के बाद युवराज को वह सुकून मिला, जिसकी उन्हें लंबे समय से तलाश थी।

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