भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आर्मेनिया पहुंचा है। यह दौरा दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते रणनीतिक और सैन्य संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
येरेवन में भव्य स्वागत, रक्षा साझेदारी पर जोर
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंचा। यहां भारत की राजदूत नीलाक्षी साहा सिन्हा और आर्मेनियाई सशस्त्र बलों के उप प्रमुख मेजर जनरल तेमूर शाहनजार्यान ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। स्वागत समारोह में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ती निकटता और आपसी भरोसे की झलक देखने को मिली।
पिनाका के बाद ब्रह्मोस पर भी बन सकती है सहमति
आर्मेनिया पहले ही भारत के साथ करीब ₹2000 करोड़ की डिफेंस डील के तहत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम खरीद चुका है। माना जा रहा है कि CDS जनरल अनिल चौहान की इस यात्रा के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल समेत अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ सकती है।
क्षेत्रीय समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकता है भारत-आर्मेनिया सहयोग
आर्मेनिया की भौगोलिक स्थिति भारत से काफी हद तक मिलती-जुलती है, जिससे उसके लिए मजबूत रक्षा ढांचे की आवश्यकता और बढ़ जाती है। खास बात यह है कि हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रमों में तुर्की और अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। अजरबैजान पाकिस्तान और तुर्की से हथियार भी खरीदता है।
पिनाका की तैनाती के बाद से ही दोनों पड़ोसी देशों में बेचैनी देखी जा रही है। ऐसे में अगर भारत-आर्मेनिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर करार होता है, तो इसे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है।
शीर्ष सैन्य नेतृत्व से होगी अहम बातचीत
इस दौरे के दौरान जनरल चौहान और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ अधिकारी आर्मेनिया के शीर्ष सैन्य नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा, संयुक्त प्रशिक्षण, सैन्य तकनीक, रक्षा उत्पादन और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह यात्रा साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पिनाका डील से मजबूत हुआ रक्षा सहयोग
भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। महज दो सप्ताह पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मेनिया के लिए पिनाका रॉकेटों की पहली खेप को रवाना किया था। ये हथियार पुणे स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा निर्मित हैं।
सितंबर 2022 में हुए समझौते के तहत आर्मेनिया ने चार पिनाका रॉकेट सिस्टम बैटरियां खरीदी थीं, जिनमें अनगाइडेड, एक्सटेंडेड-रेंज और गाइडेड तीनों प्रकार के रॉकेट शामिल हैं।
आर्मेनिया बना पिनाका का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक
आर्मेनिया पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक है। इस प्रणाली को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। पिनाका की पहली अनगाइडेड खेप की आपूर्ति जुलाई 2023 में शुरू हुई थी, जो 2024 के अंत तक पूरी हो चुकी है। अब इसके उन्नत और गाइडेड संस्करणों की आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा निर्यात को मिली मजबूती
इस रक्षा सौदे को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने का अहम उदाहरण माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि पिनाका की आपूर्ति भारत के रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता और परिपक्वता को दर्शाती है। भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ वैश्विक रक्षा निर्यातक बन रहा है।
दक्षिण कॉकस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि CDS जनरल अनिल चौहान का यह दौरा भारत-आर्मेनिया सैन्य सहयोग को नई दिशा दे सकता है। इससे संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक हस्तांतरण और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों को बल मिलेगा। साथ ही, दक्षिण कॉकस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव भी मजबूत होने की उम्मीद है।











