Sunday, July 26, 2026
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रेलवे का पूर्व कर्मचारी ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार, गौ-मांस तस्कर बताकर की थी 3 लाख रुपए की डील

भोपाल। एमपी की राजधानी भोपाल में निशातपुरा पुलिस ने रेलवे के बर्खास्त कर्मचारी राजेश तिवारी को गिरफ्तार किया है। राजेश तिवारी पर ब्लैकमेल कर अवैध रूप से तीन लाख रुपए की मांग करने के आरोप हैं। उक्त कार्रवाई असलम चमड़ा के एक करीबी की शिकायत पर की गई है।

खबर है कि राजेश तिवारी से दो ग्राम करीब एमडी ड्रग और अवैध फायर आर्म्स जब्त किया है। वह मछली गैंग और असलम चमड़ा की गोमांस तस्करी गैंग को एक्सपोज करने का दावा भी करता था।

दूसरी ओर राजेश द्वारा डीलिंग किए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं। राजेश को देर रात हिरासत में लिया गया, आज दोपहर उस पर कार्रवाई की गई है। राजेश तिवारी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है। हालांकिए अभी पुलिस के तमाम अधिकारी फिलहाल कार्रवाई की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

खबर है कि शाहजेब खान उर्फ जिब्बी असलम चमड़ा का करीबी है और जहांगीराबाद में रहता है। राजेश तिवारी लगातार उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर रहा था।

अपने वीडियो में उन्हें गो मांस तस्करी से लेकर भूफिया तक बताता था। 26 फरवरी को शाहजेब ने निशातपुरा पुलिस को शिकायती आवेदन दिया था। जिसमें राजेश द्वारा बदनाम न करने के एवज में तीन लाख रुपए की मांग किए जाने का जिक्र है। इसके बाद जिब्बी ने प्लानिंग के तहत डीलिंग की रकम देने निशातपुरा इलाके में बुलाया। जहां पुलिस ने राजेश को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

रेप और हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज हैं-

राजेश तिवारी पर नौकरी में रहते हुए रेलवे की ही एक महिला के साथ रेप के आरोप लगे थे। इसी के साथ उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का केस भी दर्ज है। वह स्वयं को सोशल मीडिया एनफ्लूएनसर भी बताता है। कई सफेदपोश लोगों के खिलाफ विवादित वीडियो प्रसारित करता रहता है।

तिरंगा लहराकर चर्चा में आए थे राजेश तिवारी-

अगस्त 2025 में मछली गैंग के खिलाफ प्रशासन के बुल्डोजर एक्शन के दौरान राजेश तिवारी चर्चा में आए थे। मछली परिवार की एक आलीशान कोठी को प्रशासन ने अवैध बताकर तोड़ा था।

तब राजेश इस कार्रवाई के समर्थन में तिरंगे के साथ मौजूद थे। तब उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि मछली गैंग ने उन्हें प्रताडि़त किया है।

अपहरण कर मारा और पीटा लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। बाद में पुलिस ने उनके आरोपों की जांच कराई थी। हालांकि जांच में उनके आरोपों के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले थे।

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