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पोस्ट आफिसों में 30 लाख का गोलमाल, जबलपुर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप

जबलपुर। एमपी के जबलपुर की सीबीआई टीम ने सागर जिले के शाहगढ़ और राहतगढ़ उप-डाकघरों में हुए 30 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है।

इस मामले में तत्कालीन उप डाकपाल मोहनलाल अहिरवार और ग्रामीण डाक सेवक मुकेश कुमार दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उत्तर उपमंडल सागर के निरीक्षक की शिकायत पर यह कदम उठाया गया है।

ऐसे करते थे घोटाला

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मोहनलाल अहिरवार ने शाहगढ़ में अपनी पदस्थापना के दौरान मुकेश कुमार दुबे के साथ मिलकर सरकारी दस्तावेजों और खाताधारकों के हस्ताक्षरों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की।

इन दोनों ने मिलकर विभिन्न खातों से 19,34,500 रुपये की अवैध निकासी की। इसके अतिरिक्त राहतगढ़ और शाहगढ़ के आरडी लॉट और अन्य खातों से भी 11,25,787 रुपये का गबन किया गया। इस तरह डाक विभाग को कुल मिलाकर 30,60,287 रुपये की वित्तीय क्षति पहुंचाई गई है।

ऐसे हुआ खुलासा

आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए एक विशेष तरीका अपनाया था। वे खाताधारकों के निकासी फॉर्म पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर देते थे। इसके अलावा जब लोग नकद राशि जमा करने डाकघर आते थे, तो आरोपी उस राशि को खातों में चढ़ाने के बजाय खुद रख लेते थे।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब कृष्णा दुबे नामक एक खाताधारक अपनी पासबुक लेकर डाकघर पहुंचे। उनकी पासबुक में 2.50 लाख रुपये जमा दर्ज थे, लेकिन जब विभाग की फिनेकल रिपोर्ट देखी गई तो उसमें वह राशि गायब थी।

इतने खाताधारकों को लगाई चपत

इस घोटाले में कई लोगों की मेहनत की कमाई हड़प ली गई। प्रभावितों में इंदिरा जैन के 2.15 लाख रुपये, द्रोपती बाई अहिरवार के 52 हजार रुपये, अन्याय जैन के 35 हजार रुपये और रामेश्वर साहू के 98 हजार रुपये शामिल हैं।

इसी तरह हर्षिता गुप्ता और कमला बाई के 25-25 हजार रुपये और उमा रजक के एक लाख रुपये की राशि भी खातों में जमा नहीं की गई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने ग्राहकों को फर्जी प्रविष्टियां दिखाकर गुमराह किया और नकद राशि अपनी जेब में रख ली।

विभाग ने किया सस्पेंड

जबलपुर सीबीआई ने मुख्य आरोपी मोहनलाल अहिरवार और मुकेश कुमार दुबे के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी पद के दुरुपयोग जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

विभाग ने कार्रवाई करते हुए मुख्य मास्टरमाइंड मोहनलाल अहिरवार को पहले ही निलंबित कर दिया है। सीबीआई अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस गबन में अन्य लोग भी शामिल थे। आने वाले समय में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।

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