जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने एक युवक की मौत से जुड़े मामले पर राज्य सरकार को नोटिस भेजते हुए पूछा है कि आखिर बिना पोस्टमार्टम के शव को कैसे दफना दिया।
मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से 7 दिनों के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले के अगली सुनवाई 18 मार्च को नियत की गई है।
याचिका हाईकोर्ट में जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी ने दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका भाई गयासुदीन कुरैशी नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव में रहता था।
26 मार्च 2025 को गयासुद्दीन एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के लिए उसे जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 27 मार्च को डॉक्टर ने हालत को देखते हुए उसे इलाज के लिए नागपुर भेज दियाए जहां उसकी मौत हो गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने में चोट का निशान बताए गए थे। ऐसे में इस मौत को सामान्य नहीं माना जा सकता। आवेदक ने 10 नवंबर 2025 को जबलपुर एसपी को आवेदन देकर मामले की जांच और पोस्टमार्टम की मांग की।
बावजूद इसके जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम करने की मांग की गई।
सिंगल बेंच ने खारिज कर दी थी याचिका-
गौरतलब है कि इससे पहले यह याचिका हाई कोर्ट की सिंगल मैच में दायर की गई थीए जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद आवेदक ने डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने कोर्ट के समक्ष दलील देते हुए बताया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम करना आवश्यक है।
7 दिन में जवाब देना होगा-
जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा कि सिंगल बेंच ने सरकार का पक्ष जाने बिना ही याचिका का निराकरण कर दिया था। इसलिए अब राज्य सरकार को रिट याचिका और रिट अपील दोनों पर ही 7 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करना होगा।











