जबलपुर/रीवा। एमपी के रीवा में जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में महिलाओं को आरक्षण नहीं दिए जाने को लेकर दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है। मामले पर अगली सुनवाई अब 8 अप्रैल को होगी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने आज मामले पर सुनवाई करते हुए स्टेट बार काउंसिल और रीवा के जिला सत्र न्यायाधीश को नोटिस जारी करते हुए अंतरिम आदेश में चुनाव पर रोक लगा दी है।
याचिका एक महिला अधिवक्ता ने दायर की है, जिन्होंने कोर्ट को बताया कि रीवा जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव, जो कि 25 मार्च को होना है, उसमें महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण का पालन नहीं किया जा रहा है। रीवा जिले की अधिवक्ता जतिंदर कौर की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में बताया गया है कि जिला बार एसोसिएशन के होने वाले चुनाव की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 7 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के तहत चुनाव की प्रक्रिया ऐसे तरीके से शुरू की गई, जो मॉडल बायलॉज और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव समिति का गठन ऐन वक्त पर किया गया। जबकि इसके लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन अनिवार्य था।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अब तक प्रारंभिक मतदाता सूची तक प्रकाशित नहीं की गई। जिससे अधिवक्ताओं को अपने नामों की पुष्टि और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर नहीं मिला। इसके अलावा सदस्यता शुल्क और वैध मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई।
30 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू न करने का आरोप-
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि एक बड़ा मुद्दा महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का भी है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस अनिवार्य प्रावधान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लैंगिक समानता के सिद्धांत के भी खिलाफ है। इन सभी आरोपों के चलते याचिकाकर्ताओं ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को अवैध और निरस्त करने की मांग की है।
मुख्य चुनाव अधिकारी वीडियो कांफे्रेसिंग के जरिए हुए पेश-
मामले पर आज हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने जिला बार चुनाव के लिए बनाए गए मुख्य चुनाव अधिकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने को कहा था। दोपहर ढाई बजे मामले पर हुई सुनवाई के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी सूर्यनाथ पांडे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई से जुड़े। बेंच ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए चुनाव पर रोक लगाने के आदेश दिए।








