Air ticket : हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब घरेलू उड़ानों के टिकटों की कीमतों में अचानक होने वाली भारी बढ़ोतरी से काफी हद तक बचाव हो सकेगा। सरकारी ईंधन कंपनियों ने नई प्राइस स्टेबिलाइजेशन स्कीम (मूल्य स्थिरीकरण योजना) लागू की है, जिसके तहत घरेलू एयरलाइंस को अगले तीन वर्षों तक जेट फ्यूल एक तय कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे हवाई किराए पर नहीं पड़ेगा, जिससे यात्रियों को अधिक स्थिर और किफायती टिकट दरों का लाभ मिलने की उम्मीद है।
Air ticket : फ्यूल की कीमत अब 115 रुपये प्रति लीटर तय की गई
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस नई योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमत अब 104.927 रुपये से बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर तय कर दी गई है. जो भी एयरलाइंस अपनी मर्जी से सरकार की इस स्कीम का हिस्सा बनेंगी, उनके लिए यह नई कीमत पूरे तीन साल तक फिक्स रहेगी. वहीं, जो एयरलाइंस इस स्कीम से बाहर रहने का फैसला करेंगी, उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से कीमत चुकानी होगी, जो कि मौजूदा समय में लगभग 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है.
Air ticket : एयरलाइंस जेट फ्यूल के नए रेटूक
इस नई और स्वैच्छिक स्कीम के तहत 86.32 रुपये प्रति लीटर की एक तय बेंचमार्क कीमत निर्धारित की गई है. इसमें एयरपोर्ट के चार्ज, तेल कंपनियों का मार्जिन और अन्य लागू टैक्स अलग से जुड़ेंगे. इसके बाद देश की राजधानी दिल्ली में इसकी प्रभावी कीमत 115 रुपये, आर्थिक राजधानी मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी. आपको बता दें कि जियोपॉलिटिकल तनाव और युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसे कंट्रोल करने के लिए यह मास्टरप्लान तैयार किया गया है.
Air ticket : 10-हजार करोड़ रुपये के फंड को हरी झंडी
तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान से बचाने और एयरलाइंस को ग्लोबल झटकों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये की इस प्राइस स्टेबिलाइजेशन स्कीम को हरी झंडी दे दी है. आम तौर पर किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च में 40 से 60 प्रतिशत तक का भारी हिस्सा सिर्फ जेट फ्यूल का ही होता है. ऐसे में इस नई व्यवस्था से फ्यूल के दाम एक सीमा में बंधे रहेंगे. इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा और सीधा फायदा हवाई यात्रियों की जेब को होने वाला है, क्योंकि इससे एयरलाइन कंपनियों पर खर्च का बोझ संतुलित रहेगा और यात्रियों को महंगे टिकटों की अचानक होने वाली मार से लंबे समय तक छुटकारा मिल जाएगा.











