Friday, April 24, 2026
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साहित्य क्षेत्र की बड़ी क्षति: मुक्तिबोध युगीन अंतिम कवि मलय का निधन

प्रगतिशील कविता के अग्रणी कवि मलय जी का आज मंगलवार को रात्रि 9 बजे 94 वर्ष की आयु में जबलपुर में निधन हो गया। वे हिन्दी साहित्य में मुक्तिबोध युगीन अंतिम कवि थे। 

डॉ मलय ने अविभाजित मध्यप्रदेश में विभिन्न शासकीय कॉलेज में हिन्दी विषय का अध्यापन किया। मलय परसाई रचनावली के संपादकों में से एक थे। मलय को नयी कविता के बाद और अकविता से पहले के कवि माना जाता है।

जीता हूँ सूरज की तरह (मलय पर केन्द्रित मूल्यांकन परक आलेखों, साक्षात्कारों एवं कुछ अन्य सामग्रियों का संकलन) पिछले दिनों प्रकाशित हुआ था। मलय के प्रकाशित 13 काव्य संग्रह हैं। उनका आलोचनात्मक कार्य व्यंग्य का सौंदर्य शास्त्र काफ़ी सराहा व महत्वपूर्ण माना गया है।

मलय को सप्तऋषि सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के अखिल भारतीय भवानी प्रसाद मिश्र कृति पुरस्कार, भवभूति अलंकरण मध्यप्रदेश साहित्य सम्मेलन, चन्द्रावती शुक्ल पुरस्कार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल शोध संस्थान वाराणसी व हरिशंकर परसाई सम्मान से सम्मानित किए गए थे। 

कवि मलय के निधन पर पहल के संपादक व विख्यात कथाकार ज्ञानरंजन ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे देश में हिन्दी के सबसे वरिष्ठ व महत्वपूर्ण कवि थे। पहल के वे अन्यतम साथी रहे। कथाकार राजेन्द्र दानी व पंकज स्वामी ने भी मलय को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से जबलपुर ही नहीं हिन्दी साहित्य की अभूतपूर्व क्षति हुई है।

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