Homeसाहित्यऔरत एक रूप अनेक: डॉ. निशा अग्रवाल

औरत एक रूप अनेक: डॉ. निशा अग्रवाल

डॉ. निशा अग्रवाल
शिक्षाविद, पाठयपुस्तक लेखिका
जयपुर, राजस्थान

नारी की शक्ति, नारी का रूप,
सहनशक्ति में वो है अनूप।
माँ, बेटी, बहन, या पत्नी,
हर किरदार में, है वो रत्न सी सत्यनी।

धरती पर वो सृजन की लहरी,
त्याग की मूरत, प्रेम की धारा बहे सारी।
समर्पण में अद्वितीय, हर पल तैयार,
धैर्य की प्रतिमा, स्नेह से अपार।

कभी वो दुर्गा, शौर्य का प्रताप,
कभी वो लक्ष्मी, घर की सुख-स्वास्थ्य का जाप।
सरस्वती बन, ज्ञान की रोशनी,
रूप बदलती, पर हमेशा है एक ही कहानी।

संघर्षों से भरी, फिर भी मुस्कान,
रात का चाँद, दिन की धूप समान।
हर रूप में सजी, वो अनोखी छवि,
जीवन की धुरी, सबसे प्यारी सभी।

आंसुओं में हंसती, कष्टों में हरी,
वो नारी ही है, जो हर खुशी से भरी।
समझदार, सक्षम, संजीवनी बनी,
नारी के बिना, ये दुनिया अधूरी कही।

हर युग में उसकी एक नई पहचान,
नारी, तुम हो सृष्टि का वरदान।
रूप अनेक, पर शक्ति वही,
तुमसे ही ये सृष्टि, तुमसे ही ये जमीं।

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