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नवरात्रि महाष्टमी: माँ महागौरी

ऐस्ट्रो ऋचा श्रीवास्तव
ज्योतिष केसरी

शारदेय नवरात्रि की महाष्टमी मंगलवार 30 सितम्बर को मनाई जाएगी। नवरात्रि की महाष्टमी को माँ महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी, नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं और श्वेतता, पवित्रता तथा तपस्या की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। माँ का स्वरूप अत्यंत कोमल, सौम्य और शांतिदायी है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इनके दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।

माँ महागौरी की उत्पत्ति

पुराणों के अनुसार जब माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर कठोर तप किया, तब उनका पूरा शरीर धूल और तपस्या की कठोरता से काला पड़ गया। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तब शिवजी ने अपनी जटाओं से गंगा जल प्रवाहित कर माता पार्वती के शरीर को स्नान कराया। उस पवित्र स्नान से उनका शरीर दिव्य प्रकाशमान और श्वेतवर्णी हो गया। उसी निर्मल स्वरूप को महागौरी कहा गया।

स्वरूप और विशेषताएँ

माँ महागौरी का रूप अत्यंत दिव्य और श्वेतवर्णी है। उनके चार हाथ हैं। दाहिने हाथ में त्रिशूल और वरमुद्रा तथा बाएँ हाथ में डमरू और अभयमुद्रा है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन नंदी है। उनके स्वरूप से करुणा, शांति और सौम्यता प्रकट होती है।

प्रिय रंग

माँ महागौरी का प्रिय रंग सफेद है। श्वेत वस्त्र और सफेद पुष्प उन्हें अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सफेद रंग शुद्धता, सात्विकता और शांतचित्तता का प्रतीक है।

प्रिय भोग

माँ महागौरी को नारियल, दूध से बनी मिठाइयाँ, सफेद रंग की मिठाई जैसे रसगुल्ला या खीर का भोग विशेष रूप से प्रिय है। भक्त यदि इन पदार्थों को अर्पित करें तो माता प्रसन्न होकर उन्हें सुख-समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद देती हैं।

वाहन

माँ महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है। बैल धैर्य, शक्ति और धार्मिकता का प्रतीक माना जाता है। इस वाहन पर आरूढ़ होकर महागौरी भक्तों को धर्ममार्ग पर चलने और सत्य का पालन करने का संदेश देती हैं। 

कुण्डलिनी चक्र में स्थान

माँ महागौरी को आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। यह चक्र अंतर्ज्ञान, आत्मज्ञान और अध्यात्मिक जागरण का केंद्र है। माँ महागौरी की कृपा से साधक की बुद्धि निर्मल होती है, विचार शुद्ध होते हैं और आत्मा परमात्मा से जुड़ने का मार्ग पाती है। ज्योतिष के अनुसार माँ महागौरी का संबंध ग्रह राहु से माना गया है। उनकी उपासना से राहु दोष, मानसिक भ्रम और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

पूजा-विधि

अष्टमी तिथि को प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनकर माँ महागौरी की पूजा की जाती है। पहले कलश की स्थापना कर देवी का आवाहन किया जाता है।

महिमा

माँ महागौरी की कृपा से साधक का मन और शरीर पवित्र हो जाता है। जीवन में शांति और सौभाग्य की वृद्धि होती है तथा विवाह और दांपत्य जीवन से जुड़ी बाधाएँ दूर होती हैं। राहु ग्रह के दोष शांत होते हैं। साथ ही आत्मज्ञान और अंतर्ज्ञान की प्राप्ति होती है। इन्हें करुणामयी, शुभदायिनी और अत्यंत कल्याणकारी देवी माना गया है।

माँ महागौरी शांति, पवित्रता और तपस्या का अद्भुत स्वरूप हैं। उनका दिव्य श्वेत रूप यह संदेश देता है कि कठोर तपस्या और धैर्य से जीवन में अंधकार मिटाकर पवित्रता और सौंदर्य प्राप्त किया जा सकता है। नवरात्रि की आठवीं तिथि पर माँ की आराधना से भक्तों के सारे दुख-दर्द दूर होते हैं और उन्हें मोक्ष के मार्ग की प्राप्ति होती है। वे संसार को यह शिक्षा देती हैं कि तपस्या, धैर्य और भक्ति से जीवन में किसी भी कठिनाई को दूर किया जा सकता हैं।

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