Monday, September 28, 2026
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बद्रीनाथ धाम में अब सख्ती, धार्मिक स्थलों के पास कार्यक्रम के लिए लेनी होगी अनुमति

बद्रीनाथ धाम और चमोली जिले के अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के आसपास होने वाले आयोजनों को लेकर जिला प्रशासन ने अब अनुमति व्यवस्था को सख्त कर दिया है. प्रशासन के नए निर्देशों के बाद तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों और ऐसे आयोजनों पर नियंत्रण रहेगा, जिनसे धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती हैं. किसी भी कार्यक्रम के लिए अब स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा.

अनुमति की जिम्मेदारी तय

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों के आसपास कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी. प्रस्तावित आयोजन की जांच संबंधित उपजिलाधिकारी करेंगे और अनुमति देने का अधिकार भी उन्हीं के स्तर पर रहेगा.

इस व्यवस्था के जरिए प्रशासन ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि किसी धार्मिक स्थल के आसपास कार्यक्रम की अनुमति देने की प्रक्रिया अलग-अलग विभागों में बंटी न रहे. नियमों का उल्लंघन होने पर आयोजकों या संबंधित समितियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.

सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद उठा विवाद

यह फैसला 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ धाम के पास विकसित पर्यटक आगमन प्लाजा में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 के बाद सामने आया है. कार्यक्रम को लेकर स्थानीय नागरिकों, धार्मिक प्रतिनिधियों और कुछ श्रद्धालुओं की ओर से आपत्तियां जताई गई थीं.

आपत्ति का प्रमुख मुद्दा धार्मिक स्थल के निकट तेज ध्वनि वाले कार्यक्रम और आयोजन के स्वरूप को लेकर रहा. इसके बाद प्रशासन ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए पहले से अनुमति और परीक्षण की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया.

आयोजन स्थल को लेकर भी सामने आया अलग पक्ष

प्रशासन और आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार महोत्सव मंदिर के मुख्य परिसर में नहीं, बल्कि बाहरी पर्यटक आगमन प्लाजा में आयोजित किया गया था. इसे जिला प्रशासन और सेना की ओर से ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित कार्यक्रम बताया गया.

आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों के लोगों और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैन्यकर्मियों के बीच संपर्क बढ़ाना तथा सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना था. कार्यक्रम की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई थी.

धार्मिक स्वरूप के अनुरूप आयोजन की मांग

बद्रीनाथ क्षेत्र से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों का कहना है कि भविष्य के कार्यक्रमों का स्वरूप क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप होना चाहिए. बद्री धाम धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने भविष्य में भजन संध्या और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों जैसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की बात कही.

पूर्व बद्रीनाथ धाम धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने भी धार्मिक नगरी की विरासत और मर्यादा के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई.

पर्यटन और धार्मिक पहचान के बीच संतुलन की चुनौती

बद्रीनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों की अनुमति देते समय धार्मिक वातावरण, स्थानीय भावनाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जाए.

नई अनुमति व्यवस्था इसी संतुलन की दिशा में प्रशासनिक कदम के रूप में देखी जा रही है. आने वाले समय में किसी भी बड़े आयोजन से पहले उसके स्थान, ध्वनि स्तर, स्वरूप और धार्मिक स्थल पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जांच महत्वपूर्ण होगी.

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