Wednesday, January 21, 2026
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विजयादशमी अर्थात सत्य की जीत निश्चित और अधर्म का नाश अवश्यंभावी है

ऐस्ट्रो ऋचा श्रीवास्तव
ज्योतिष केसरी

विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है और अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। इस बार विजयादशमी 2 अक्टूबर गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विजयादशमी का पौराणिक आधार

इस पर्व से कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं- रामायण के अनुसार भगवान राम ने दस सिर वाले रावण का वध इसी दिन किया था। रावण अहंकार, अधर्म और पाप का प्रतीक था। उसके वध से यह संदेश मिलता है कि चाहे बुराई कितनी भी बलवान क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। वहीँ देवी दुर्गा ने नवरात्रि के नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दशमी के दिन उसका वध किया। इसीलिए इस पर्व को विजयादशमी कहा जाता है।

धार्मिक महत्व

विजयादशमी नवरात्रि का अंतिम दिन है। नवरात्रि में साधक अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को साधने और सकारात्मकता को जागृत करने का प्रयास करता है। दशमी को यह साधना पूर्ण होती है और विजय का संदेश मिलता है। इस दिन देवी दुर्गा की विदाई होती है और भक्त उन्हें अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण देते हैं। शस्त्र-पूजन और आयुध-पूजन की परंपरा भी इसी दिन निभाई जाती है। यह दर्शाता है कि शक्ति का प्रयोग केवल धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना के लिए होना चाहिए।

सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष

भारत में विजयादशमी का उत्सव विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला का मंचन होता है और शाम को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। पश्चिम बंगाल और असम में इसे दुर्गा विसर्जन के रूप में मनाया जाता है। माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का जल में विसर्जन कर भक्त उनकी विदाई करते हैं। दक्षिण भारत में शस्त्र-पूजन और सरस्वती पूजा का विशेष आयोजन होता है। महाराष्ट्र और गुजरात में लोग एक-दूसरे को आम्रपत्र (आम की पत्तियाँ) और शमी के पत्ते देकर विजय का आशीर्वाद देते हैं।

विजयादशमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष विजयादशमी गुरुवार 2 अक्टूबर को पड़ेगी। दशमी तिथि का प्रारंभ बुधवार 1 अक्टूबर को शाम 7:01 बजे होगा, वहीं दशमी तिथि का समापन गुरुवार 2 अक्टूबर को शाम 7:10 बजे होगा।

शस्त्र पूजन शुभ मुहूर्त

विजय मुहूर्त 2 अक्टूबर को दोपहर 2:09 से 2:56 बजे तक शुभ माना गया है। इस समय देवी पूजन, शस्त्र पूजन और नए कार्य का आरम्भ अत्यंत मंगलकारी होगा।

अध्यात्मिक महत्व

विजयादशमी केवल ऐतिहासिक या धार्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शिक्षा भी देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार, क्रोध, मोह और लोभ जैसे आंतरिक रावणों का नाश करना भी उतना ही आवश्यक है जितना बाहरी शत्रु का। नवरात्रि में साधक मन, वचन और कर्म को शुद्ध करता है, और दशमी पर उसकी साधना पूर्ण फलित होती है। यह दिन नयी शुरुआत का प्रतीक है। कई लोग इस दिन व्यापार, शिक्षा या जीवन के अन्य नए कार्यों का आरंभ करते हैं।

अतः विजयादशमी धर्म, सत्य और न्याय की विजय का पर्व है। यह हमें प्रेरणा देता है कि चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ और बुराइयाँ क्यों न हों, यदि हम धैर्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलते हैं तो अंततः विजय हमारी ही होगी। सन 2025 में 2 अक्टूबर को आने वाली विजयादशमी भी हमें यही संदेश देगी- “सत्य की जीत निश्चित है और अधर्म का नाश अवश्यंभावी है।”

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