कदमकुआं थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार घटना की रात कोचिंग संस्थान के बाहर तनावपूर्ण माहौल बन गया था. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान खान सर भी मौके पर पहुंचे थे. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कथित रूप से अपने सुरक्षाकर्मियों को फायरिंग करने के लिए कहा, जिसके बाद गार्डों ने हवा में कई राउंड गोलियां चलाईं. हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में केवल फायरिंग ही नहीं, बल्कि घटना के बाद पुलिस को दी गई जानकारी और साक्ष्यों के प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक स्तर पर पुलिस को जो जानकारी दी गई, उसमें कई विरोधाभास पाए गए. इसके अलावा घटनास्थल से जुड़े कुछ साक्ष्यों को हटाने या छिपाने की कोशिश किए जाने की भी जांच की जा रही है.
पुलिस ने खान सर के खिलाफ आर्म्स एक्ट से संबंधित प्रावधानों के अलावा कथित रूप से गलत सूचना देने और जांच को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया है. मामले में बरामद हथियारों को जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है, जहां उनकी तकनीकी जांच की जा रही है.
घटना के बाद छात्रों में भी काफी हलचल देखी गई थी. 3 जून को बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग संस्थान के बाहर एकत्र हुए थे और विरोध प्रदर्शन किया था. हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. उस दौरान एक सुरक्षाकर्मी के घायल होने की भी सूचना सामने आई थी, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान खान सर के बयानों को लेकर भी चर्चा रही. घटना के बाद उन्होंने विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग बातें कहीं, जिन्हें पुलिस जांच का हिस्सा बना रही है. वहीं खान सर का कहना है कि उन्हें प्राथमिकी की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे.
पटना पुलिस ने छात्रों और अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें. पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है. फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.











