Friday, April 17, 2026
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राज्य ट्रांसमिशन ग्रिड में निजी निवेश की तैयारी, मोदी सरकार की 30GWh VGF योजना शुरू

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी को हर समय बिजली उपलब्ध कराना है और सरकार का लक्ष्य पूरे देश में सभी घरों में बिजली पहुंचाना है। केंद्रीय मंत्री मनोहर ने घोषणा की, कि देश अपनी सभी बिजली मांगों को पूरा करते हुए पर्याप्त बिजली वाला देश बन गया है और बिजली अधिशेष वाले देश की ओर अग्रसर है।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि उल्लेखनीय वृद्धि और मजबूती का प्रदर्शन करते हुए भारत ने 9 जून, 2025 को 241 गीगावाट की अधिकतम बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि देश के मजबूत बिजली बुनियादी ढांचे को दर्शाती है, जिसमें शून्य पीक शॉर्टेज की सूचना है।

बैटरी ऊर्जा भंडारण को बड़ा बढ़ावा

मनोहर लाल ने घोषणा की कि ऊर्जा सुरक्षा और अक्षय एकीकरण के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास करते हुए विद्युत मंत्रालय ने पहले से चल रही 13.2 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) के अतिरिक्त 30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना को मंजूरी दे दी है। 5,400 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य 2028 तक देश की बीईएसएस जरूरत को पूरा करते हुए 33,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है।

भंडारण को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री नोहर लाल ने बताया कि भंडारण परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क की छूट को 30 जून, 2028 तक बढ़ा दिया गया है। इससे इस तिथि से पहले आवंटित पंप स्टोरेज परियोजनाओं और चालू की गई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को लाभ मिलेगा। यह विस्तार भारत की बढ़ती भंडारण जरूरतों को पूरा करने और ट्रांसमिशन लाइनों के उपयोग को अनुकूलतम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

यूएचवी एसी ट्रांसमिशन सिस्टम

मनोहर लाल ने कहा कि अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (यूएचवी एसी) ट्रांसमिशन सिस्टम के लागू होने से भारत अपने विद्युत पारेषण में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है। 2034 तक विकास के लिए नौ 1100 केवी लाइनें और दस सबस्टेशन चिन्हित किए गए हैं। साथ ही केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान की तरफ से परीक्षण सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इसमें 53,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों के लिए मुआवजा बढ़ा

मनोहर लाल ने कहा कि एक ऐतिहासिक कदम के तहत केन्द्र सरकार ने मार्ग के अधिकार से जुड़े मुद्दों को आसान बनाने के लिए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने में इस्तेमाल की जाने वाली भूमि के मुआवजे में वृद्धि की है। टावर क्षेत्र के लिए मुआवज़ा भूमि मूल्य के 85 प्रतिशत से बढ़कर 200 प्रतिशत हो गया है और राइट ऑफ़ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के लिए मुआवज़ा 15 प्रतिशतसे बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है, जिससे भूमि मूल्य सीधे बाज़ार दरों से जुड़ गया है। हरियाणा और दिल्ली ने 21 मार्च, 2025 को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों को पहले ही लागू कर दिया है।

राज्य ट्रांसमिशन ग्रिड में अधिक निजी निवेश

अधिक निजी निवेश को आकर्षित करने और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए, विलंबित भुगतान अधिभार (एलपीएस) नियमों का विस्तार करके अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणालियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। पहले केवल अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणालियों पर लागू होने वाले इस महत्वपूर्ण सुधार का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा को अवशोषित करने के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण नेटवर्क का विस्तार करना है।

अक्षय ऊर्जा

मनोहर लाल ने यह भी कहा कि एक अभूतपूर्व उपलब्धि के रूप में, देश ने वर्ष 2024-25 के दौरान 34 गीगावाट की अपनी अब तक की सबसे अधिक उत्पादन क्षमता जोड़ी है। इसमें अक्षय ऊर्जा का योगदान 29.5 गीगावाट है। देश की कुल स्थापित क्षमता अब 472.5 गीगावाट है, जो 2014 में 249 गीगावाट थी।

250 मेगावाट टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना चालू

ग्रिड में लचीलापन जोड़ते हुए, उत्तराखंड में टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना (पीएसपी) की 250 मेगावाट की पहली इकाई चालू कर दी गई है। यह परियोजना पीक डिमांड को बेहतर तरीके से पूरा करने और अक्षय ऊर्जा को एकीकृत करने में मदद करेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कमी

उत्पादन और पारेषण क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण देश की राष्ट्रीय ऊर्जा की कमी अप्रैल 2025 तक महज 0.1 प्रतिशत तक कम रह गई है। यह 2013-14 में अनुभव की गई 4.2 प्रतिशत की कमी की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इससे सभी के लिए अधिक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

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