नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन और देश के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भले ही सरकार का समर्थन हासिल हो, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप 2026 या खास तौर पर भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार की अटकलें हकीकत से दूर नजर आ रही हैं। पाकिस्तान ने टूर्नामेंट के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है, हालांकि बोर्ड अभी सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
आईसीसी समझौता बना सबसे बड़ी बाधा
पीसीबी, अन्य क्रिकेट बोर्ड्स की तरह, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के इवेंट्स के लिए मेंबर पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर चुका है। यह एक कानूनी दस्तावेज है, जिसका उल्लंघन करने पर आईसीसी कड़ी कार्रवाई कर सकती है। यदि पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार करता है, तो न सिर्फ आईसीसी बल्कि मेजबान ब्रॉडकास्टर भी पीसीबी को अदालत में घसीट सकता है।
38 मिलियन डॉलर की कमाई दांव पर
RevSportz की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान मैच से करीब 38 मिलियन डॉलर (लगभग 348 करोड़ रुपये) की सीधी कमाई जुड़ी है। यह रकम विज्ञापन स्लॉट, ब्रांडेड प्रोग्रामिंग और स्पॉन्सरशिप से आती है। ऐसे में मैच से हटने का फैसला पीसीबी को भारी आर्थिक नुकसान और गंभीर कानूनी मुश्किलों में डाल सकता है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात, अंतिम फैसला जल्द
इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने के लिए मोहसिन नकवी ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। बैठक के बाद नकवी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि प्रधानमंत्री को आईसीसी से जुड़े सभी पहलुओं से अवगत कराया गया है और निर्देश मिले हैं कि सभी विकल्पों पर विचार किया जाए।
नकवी के मुताबिक, टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला शुक्रवार या अगले सोमवार तक ले लिया जाएगा।
बहिष्कार की कीमत चुकाना होगा महंगा
पाकिस्तानी मीडिया में यह चर्चा जरूर है कि बांग्लादेश के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद पाकिस्तान एकजुटता दिखाने के अलग-अलग तरीके अपना सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बहिष्कार का रास्ता अपनाने पर पीसीबी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है — जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।











