नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को WhatsApp–Meta के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए डेटा प्राइवेसी के मुद्दे पर सख्त टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने Meta के मालिक मार्क जुकरबर्ग की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर WhatsApp से जुड़ा एक भी डेटा इधर-उधर गया, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी कंपनी भारत की प्राइवेसी के साथ “खेल” नहीं सकती और भारतीय यूज़र्स के डेटा का एक भी सिंगल डिजिट साझा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए, जबकि WhatsApp–Meta की ओर से मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि CCI द्वारा लगाया गया जुर्माना जमा कर दिया गया है, हालांकि मामला अपील के अधीन है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि अगले आदेश तक निकाली नहीं जाएगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी अपीलों को तीन-सदस्यीय पीठ के समक्ष अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए और चार सप्ताह के भीतर काउंटर दाखिल किया जाए।
CJI सूर्यकांत बोले—भारतीय नागरिकों के डेटा से कोई समझौता नहीं
डेटा गोपनीयता पर तीखी टिप्पणी करते हुए CJI ने सवाल उठाया कि क्या WhatsApp से बाहर निकल जाना कोई वास्तविक विकल्प है, अगर इसके बावजूद डेटा साझा किया जाए। कोर्ट ने दो टूक कहा कि या तो कंपनी स्पष्ट अंडरटेकिंग दे, या फिर डेटा शेयरिंग की अनुमति नहीं मिलेगी। नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर भी गंभीर सवाल उठाए। CJI ने कहा कि यह नीति इतनी जटिल और चालाकी से बनाई गई है कि एक आम यूज़र—चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र से हो, केवल तमिल समझता हो या सड़क पर सब्ज़ी बेचने वाली बुज़ुर्ग महिला—उसकी मंशा समझ ही नहीं सकता। कोर्ट ने सूचित सहमति (Informed Consent) पर ज़ोर देते हुए कहा कि टेक कंपनियां यूज़र्स की अज्ञानता या भाषा की सीमाओं का फायदा नहीं उठा सकतीं।
अंत में मुख्य न्यायाधीश ने साफ संदेश देते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की निजता से कोई समझौता नहीं होगा। यदि कोई कंपनी भारत के संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का पालन नहीं कर सकती, तो उसके पास भारत छोड़ने का विकल्प खुला है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी को होगी, जहां डेटा प्राइवेसी और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर अहम फैसला आने की संभावना है।











