जल गंगा संवर्धन अभियान :गौर नदी नर्मदा बेसिन की प्रमुख नदियों में से एक है, जो छोटी-छोटी जलधाराओं से निर्मित होकर अनेक गांवों को जीवन प्रदान करती हुई जबलपुर जिले के जमतरा क्षेत्र में नर्मदा नदी में समाहित हो जाती है। यह नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों, किसानों, पशु-पक्षियों और जंगलों के जीवन का आधार है।
जल गंगा संवर्धन अभियान : गौर नदी का उद्गम मंडला जिले की निवास तहसील के भटगांव स्थित एक प्राचीन तालाब से हुआ है। तालाब के किनारे गौरा-गौरी का छोटा मंदिर स्थित है और इसी मंदिर के नाम पर इस नदी का नाम “गौर नदी” पड़ा। स्थानीय मान्यता के अनुसार पूर्व में इस तालाब से इतना अधिक जल प्रवाहित होता था कि वह तालाब की मेढ़ को फोड़कर बह निकलता था। इसी कारण ग्रामीण इसे “फूटाताल” के नाम से भी जानते हैं।
जल गंगा संवर्धन अभियान
जल गंगा संवर्धन अभियान : जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान तालाब की मेढ़ के समीप एक जलकुंड का निर्माण किया गया है, जहां से गौर नदी की पतली धारा प्रवाहित होती दिखाई देती है। वर्षाकाल में यह नदी पूरे क्षेत्र की जलधाराओं को समेटते हुए विशाल रूप धारण कर लेती है, जबकि ग्रीष्मकाल में इसका जल ग्रामीणों के लिए पेयजल, घरेलू उपयोग, खेती एवं पशुपालन का प्रमुख आधार बन जाता है।
जल गंगा संवर्धन अभियान : हालांकि गौर नदी आकार में बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन जबलपुर जिले की महत्वपूर्ण नदियों में इसका विशेष स्थान है। वर्तमान समय में बढ़ते शहरीकरण और मानव गतिविधियों के कारण नदी का जल प्रभावित अवश्य हुआ है, लेकिन जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर निगम द्वारा गौर नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए प्रभावी पहल की जा रही है।
अभियान के तहत नदी से कचरा हटाने, जल स्रोतों के संरक्षण तथा स्वच्छता कार्य लगातार किए जा रहे हैं। नगर निगम द्वारा गौर नदी को मूल स्वरूप में लाने के लिये लगभग 8 करोड़ रूपये की लागत से कार्य योजना तैयार की गई है।
जल गंगा संवर्धन अभियान
जल गंगा संवर्धन अभियान : गौर नदी के किनारे अनेक गांव बसे हुए हैं। क्षेत्र के किसान इस नदी के जल से सिंचाई करते हैं तथा पशुपालक एवं ग्रामीण समुदाय दैनिक आवश्यकताओं के लिए इसी नदी पर निर्भर रहते हैं। गौर नदी का पारिस्थितिकी तंत्र भी अत्यंत समृद्ध है। नदी किनारे स्थित वृक्ष, वनस्पतियां एवं निर्मित स्टॉप डेम भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जल गंगा संवर्धन अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 जून 2025 को कुंडम क्षेत्र के ग्राम छपरा में आयोजित कार्यक्रम में गौर नदी पर लगभग 1400 करोड़ रुपये की लागत से “गौमुख जलाशय” निर्माण की घोषणा की थी। प्रस्तावित जलाशय से लगभग 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिसमें मंडला जिले का लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र भी शामिल रहेगा।
जल गंगा संवर्धन अभियान : गौमुख जलाशय परियोजना के मूर्त रूप लेने से क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की संभावना है। इससे सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा, मत्स्य पालन एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा बाढ़ नियंत्रण में भी सहायता प्राप्त होगी। पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलने के साथ गौर नदी की पहचान एक समृद्ध एवं जीवनदायिनी नदी के रूप में स्थापित होगी।