Bargi बांध में हुए भीषण क्रूज हादसे को लेकर अब लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पर्यटन विभाग और क्रूज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
कलेक्ट्रेट कार्यालय में बयान दर्ज कराने पहुंचे क्रूज पायलट महेश पटेल ने कई ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पायलट का कहना है कि क्रूज के इंजन में खराबी की जानकारी विभाग को महीनों पहले ही दे दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधार करने के बजाय चेतावनी देने वालों पर ही कार्रवाई कर दी।
अब यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और SIT जांच की मांग भी तेज हो गई है।

Bargi क्रूज हादसे इंजन खराब होने की पहले ही दी गई थी जानकारी
क्रूज के पायलट महेश पटेल ने बयान में बताया कि क्रूज लंबे समय से तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा था। उनके अनुसार अक्टूबर 2025 में मैकल रिसॉर्ट के तत्कालीन मैनेजर सुनील मरावी ने पर्यटन विभाग के भोपाल मुख्यालय को एक लिखित पत्र भेजा था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि क्रूज के दो इंजनों में से एक की क्षमता काफी कम हो चुकी है और दूसरा इंजन भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। बताया गया कि दूसरा इंजन कई बार अचानक बंद हो जाता था, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विभाग ने इस तकनीकी समस्या को दूर करने के बजाय रिपोर्ट भेजने वाले मैनेजर को ही सस्पेंड कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर उस समय चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता, तो क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
Bargi क्रूज हादसे के समय क्या हुआ?
हादसे के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा थी कि पायलट मौके से भाग गया था। लेकिन महेश पटेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसने यात्रियों की जान बचाने की पूरी कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान अचानक एक बड़ी लहर क्रूज के अंदर आ गई, जिसके तेज बहाव में वह खुद बह गया था।
पायलट का कहना है कि वह डरकर नहीं भागा बल्कि खुद भी हादसे का शिकार हो गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों को पहले ही लाइफ जैकेट पहनने के लिए कहा गया था, लेकिन कई लोगों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।अगर सभी यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी होती, तो नुकसान काफी कम हो सकता था।
Bargi क्रूज हादसे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद अब सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जलयान में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। अगर इंजन में पहले से खराबी थी, तो क्रूज को संचालन की अनुमति कैसे दी गई? क्या तकनीकी निरीक्षण सही तरीके से नहीं हुआ? क्या यात्रियों को सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने में लापरवाही हुई? ये सभी सवाल अब जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

Bargi क्रूज हादसे हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पर्यटन विभाग को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच के लिए IG स्तर के अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि जांच की समय सीमा तय की जाए और 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
Bargi क्रूज हादसे क्रूज तोड़ने पर नया विवाद
बरगी क्षेत्र के विधायक नीरज सिंह ने हादसे के बाद क्रूज को जल्दबाजी में तोड़े जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। विधायक का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट करना बेहद संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम सबूत मिटाने की साजिश भी हो सकता है। विधायक ने सवाल उठाया कि आखिर किस अधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई और इतनी जल्दी क्रूज को तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने इस पूरे मामले में अलग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
Bargi क्रूज हादसे प्रशासन पर बढ़ा दबाव
बरगी क्रूज हादसे के बाद प्रशासन और पर्यटन विभाग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते तकनीकी खामियों को सुधारा जाता, तो कई जिंदगियां बच सकती थीं। अब लोग सिर्फ हादसे की जांच नहीं बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Bargi क्रूज हादसे जनता में नाराजगी
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब पहले से खतरे की जानकारी थी, तो क्रूज को संचालन की अनुमति क्यों दी गई? कई लोगों ने इसे सीधी प्रशासनिक लापरवाही बताया है।
Bargi क्रूज हादसे निष्कर्ष
बरगी बांध क्रूज हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही का मामला बन चुका है। इंजन खराब होने की पहले से जानकारी, चेतावनी देने वालों पर कार्रवाई, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल और जांच से पहले क्रूज तोड़ने जैसे आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब सभी की नजर हाईकोर्ट और संभावित SIT जांच पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि इस हादसे के पीछे की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।











