जबलपुर। एमपी के जबलपुर में क्राइम ब्रांच ने ठग गिरोह का पर्दाफाश किया। आरोपियों ने गड़ा हुआ सोना मिलने का झांसा देकर डॉक्टरों को 1.60 करोड़ रुपए की ठगी की है। पुलिस ने एक ही परिवार के 4 लोगों को झांसी से गिरफ्तार किया।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने बताया कि हरियाणा के फरीदाबाद में रहने वाले पन्नालाल राठौर उम्र 60 वर्ष, धर्मेन्द्र 34 वर्ष, वीरेन्द्र 30 वर्ष व रामादेवी 52 वर्ष पहले डॉक्टरों से इलाज के बहाने संपर्क करते थे। इसके बाद खुद को मजदूर बताकर कहते थे कि खुदाई में गड़ा हुआ सोना मिला है।
वे इसे बेच नहीं पाने की बात कहकर सस्ते दाम में देने का लालच देते थे। भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में 4-5 असली सोने की गिन्नियां देते थे, जो जांच में असली निकलती थीं।
इससे पीडि़तों का विश्वास पक्का हो जाता था। इसके बाद आरोपी करीब 12 लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से बड़ी मात्रा में सोना देने का लालच देते थे।
सौदा तय होने पर वे नकली सोने की गिन्नियां या बिस्किट देकर रकम ले लेते थे। जब तक पीडि़त को धोखाधड़ी का पता चलता तब आरोपी फरार हो जाते थे।
इस तरह भरोसा बनाकर और लालच देकर ठगी को अंजाम दिया जाता था। ठगों ने जबलपुर में 1 अप्रैल 2026 को एक पीडि़त से 7 किलो नकली सोना देकर करीब 10 लाख रुपए की ठगी की, 3 अप्रैल 2026 5 किलो सोने के नाम पर 50 लाख रुपए लिए गए। फिर 4 अप्रैल 2026 को 12 किलो नकली सोना देकर 1 करोड़ रुपए की ठगी की गई।
This is how the police caught the gang-
शिकायतें एसपी संपत उपाध्याय तक पहुंचने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम बनाई गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर झांसी में दबिश देकर गिरफ्तार किया गया।
The family had hatched a fraudulent scheme together.
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह एक ही परिवार का है, जो संगठित तरीके से ठगी करता था। सभी आरोपी अलग-अलग भूमिकाएं निभाते थे। लोगों को विश्वास में लेकर बड़ी रकम ऐंठते थे।
1.55 crore cash, gold and fake coins recovered
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने पनागर क्षेत्र में किराए के मकान में रकम छिपाने की जानकारी दी। तलाशी में वहां से 1 करोड़ 55 लाख रुपए नकद, 84 ग्राम असली सोना, करीब 20 किलो नकली सोने की गिन्नियां और 11 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
एसपी संपत उपाध्याय ने बताया कि पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्होंने और किन लोगों को निशाना बनाया। साथ ही गिरोह के नेटवर्क और ठगी के पूरे पैटर्न की जांच जारी है।











