उज्जैन। होली के ठीक पहले मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेशभर के 29 हजार से ज्यादा निजी बस संचालकों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो उज्जैन, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित ग्रामीण इलाकों तक यात्री परिवहन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
त्योहार के मौसम में लाखों लोग घर लौटने के लिए बसों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बसों के पहिए थमने से छात्रों, मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे व्यापारियों पर सीधा असर पड़ेगा। वैकल्पिक साधनों पर दबाव बढ़ने और किराए में उछाल की आशंका भी जताई जा रही है।
नई परिवहन नीति को लेकर विरोध
बस ऑपरेटरों का विरोध अप्रैल 2026 से लागू होने वाली “मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा” योजना को लेकर है। उनका आरोप है कि नई नीति से पारंपरिक निजी संचालकों का व्यवसाय खतरे में पड़ सकता है।
संचालकों का कहना है कि नई व्यवस्था में परमिट एक कंपनी के जरिए टेंडर प्रक्रिया से दिए जाएंगे, जिससे छोटे और पारंपरिक ऑपरेटर बाहर हो सकते हैं। उनका दावा है कि इस मॉडल से किराए में करीब 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, सरकार इसे यात्री सुविधा, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है।
हड़ताल का अल्टीमेटम
प्राइम रूट बस संगठन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यदि 1 मार्च तक सरकार ने ठोस आश्वासन नहीं दिया, तो 2 मार्च से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
संगठन का कहना है कि कई दौर की चर्चाओं और ज्ञापन के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। उन्होंने माना कि आम जनता को असुविधा होगी, लेकिन संचालकों के पास अब और कोई विकल्प नहीं बचा है।
PPP मॉडल पर संचालन, डिजिटल निगरानी की तैयारी
सरकार अप्रैल 2026 से नई परिवहन नीति लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत बस संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर होगा।
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सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी।
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निजी ऑपरेटरों की बसें लीज पर ली जाएंगी।
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संचालन, निगरानी और नियंत्रण सरकारी तंत्र के माध्यम से होगा।
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बस ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और टाइम-टेबल के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और अनुशासित परिवहन सुविधा मिलेगी।
त्रि-स्तरीय निगरानी ढांचा
योजना के तहत “मध्य प्रदेश पैसेंजर ट्रांसपोर्ट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड” नाम से राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे।
संभाग स्तर पर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और रीवा में सहायक कंपनियां काम करेंगी। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां किराया निर्धारण और रूट तय करेंगी। इंदौर संभाग में संचालन की जिम्मेदारी AICTSL को सौंपी जाएगी।
यात्रियों पर संभावित असर
प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण और इंटरसिटी मार्गों पर बसें ही मुख्य परिवहन साधन हैं। ट्रेन कनेक्टिविटी सीमित है और निजी टैक्सी या कैब सेवाएं महंगी पड़ती हैं।
यदि हड़ताल लंबी चली, तो परीक्षार्थियों, कामकाजी लोगों और त्योहार पर घर लौटने वालों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में किराए बढ़ने और अवैध वाहन संचालन में इजाफा होने की आशंका है।
समाधान की राह पर नजर
सरकार जहां नई नीति को पारदर्शिता और यात्री सुविधा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं बस संचालक इसे अपने आर्थिक ढांचे पर खतरा मान रहे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि होली से पहले दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता होता है या नहीं। यदि वार्ता विफल रही, तो प्रदेश में परिवहन संकट गहरा सकता है।











