Friday, April 24, 2026
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महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय मध्‍य प्रदेश- राज्यपाल ने किया एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी का नामकरण

मध्‍य प्रदेश के राज्‍यपाल व कुला‍धिपति मंगुभाई पटेल की अध्‍यक्षता में आज जबलपुर स्थित मध्‍य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्‍कृतिक एवं सूचना केन्‍द्र में आयोजित किया गया। इस दौरान समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का नाम शल्य चिकित्सा के जनक महर्षि सुश्रुत के नाम पर रखने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह का दिन विद्यार्थियों के लिए संस्थान में उनकी शिक्षा पूरी हो जाने के बाद जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने वाला मील का पत्थर होता है। मेडिकल शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जो विद्यार्थियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाता है और उन्हें समाज के लिए कुछ करने का अवसर प्रदान करता है। चिकित्सकों का कार्य सिर्फ रोगों का इलाज करना नहीं है बल्कि लोगों को खुश और स्वस्थ रखना, रोगी के अंदर बीमारी से लड़ने का आत्मविश्वास पैदा करना और जीवन की उम्मीद जगाना भी है।

विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक जीवन पूर्ण होने पर राज्यपाल ने उन्हें जीवन में प्रगति के लिए निरंतर सीखने की इच्छा बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी का स्वभाव हो तो छोटे से छोटे आदमी से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सीखने से ऊर्जा का निरंतर संचार होता है और सामर्थ्य भी विकसित होता है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने संस्थान से आधुनिकतम तकनीकों को अपनाने के लिए सदैव तत्पर रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आधुनिकतम तकनीकों को अपनाने से रोगियों का इलाज सुगम तो होता ही है। साथ ही चिकित्सकों की कार्य दक्षता में भी बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए समाज के वंचित वर्ग में ऐसी आकांक्षा जगाने की आवश्यकता है जिससे वे भी देश के विकास में हिस्सेदार बन सकें।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्वगुरु के रूप में स्थापित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का फल लोगों को तभी मिलेगा जब वे निरोगी होंगे। लोगों को निरोगी करने के लिए डॉक्टरों की महती आवश्यकता है। प्रदेश को मेडिकल का हब बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमबीबीएस की 75 हजार सीटे बढ़ाने का संकल्प लिया है। मध्य प्रदेश में शासकीय और निजी संस्थानों को मिलाकर एमबीबीएस की 5 हजार और स्नातकोत्तर की ढाई हजार सीटे हैं। राज्य सरकार ने इन्हें बढ़ाकर क्रमशः 10 हजार एवं 5 हजार करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि 230 बेड के जिला चिकित्सालयों को स्नातकोत्तर संस्थानों के रूप में विकसित कर फैकल्टी की आपूर्ति की जा रही है।

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