जबलपुर। सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को दिए जा रहे 100 प्रति शत आरक्षण पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आ गया है। हाईकोर्ट ने पुरुष उम्मीदवार की याचिका पर आज सुनवाई करते हुए ईसीबी को आदेश दिया कि भर्ती के लिए संशोधित विज्ञापन जारी किया जाए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल धगट की कोर्ट में ईसीबी ने बताया कि विज्ञापन मंगलवार रात ही संशोधित कर दिया गया है। अब महिलाओं के साथ-साथ पुरुष उम्मीदवारों को भी आवेदन करने का मौका मिलेगा। संशोधित विज्ञापन में अब महिलाओं के लिए 100 प्रतिशत आरक्षण की शर्त हटा दी गई है। पुरुष उम्मीदवार अब 13 जनवरी तक अपना आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं।
16 दिसंबर को जारी भर्ती विज्ञापन में प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर व 218 सिस्टर ट्यूटर की भर्ती में सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। ऐसे में जबलपुर निवासी नौशाद अली एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने याचिका दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया था।
जबकि भर्ती नियम तथा अपेक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं। इसके बावजूद लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 व भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही थी। याचिका में आरोप लगाया था कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया है।
संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह प्रत्यक्ष रूप से लिंग भेदभाव है। इस मामले पर 29 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया था। मंगलवार को भी प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें सरकार ने मौखिक रूप से कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने ट्यूटर के 218 विज्ञापित पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार देते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी।











