Bragi Dam: मध्य प्रदेश के बरगी बांध में हुए चर्चित क्रूज हादसे की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रहे आयोग के सामने शिकायतकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने एक नया शपथ पत्र पेश किया है। इस हलफनामे के सामने आने के बाद क्रूज संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शपथ पत्र में दावा किया गया है कि जिस क्रूज में हादसा हुआ था, उसके पास यात्रियों और संचालन से जुड़ी कोई वैध बीमा सुरक्षा मौजूद नहीं थी। इसके बाद मामले में प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
Bragi Dam: क्रूज के बीमा पर उठे बड़े सवाल
अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार, जिस बीमा पॉलिसी का हवाला दिया जा रहा था, वह क्रूज के लिए नहीं थी। शपथ पत्र में दावा किया गया है कि बीमा कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह पॉलिसी एक निजी रिसॉर्ट के लिए जारी की गई थी।
इसका मतलब यह हुआ कि क्रूज संचालन के लिए जरूरी बीमा कवर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी यात्री सेवा से जुड़े जलयान के लिए बीमा सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। इससे हादसे के समय यात्रियों और संचालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
Bragi Dam: नियमों की अनदेखी कर संचालन का आरोप
शपथ पत्र में आरोप लगाया गया है कि क्रूज संचालन के दौरान जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया। अंतर्देशीय जलयान अधिनियम और मध्य प्रदेश अंतर्देशीय वाष्प जलयान नियम 1962 के तहत कई सुरक्षा मानक तय किए गए हैं।
इन नियमों के अनुसार किसी भी जलयान को चलाने से पहले तकनीकी सर्वे, फिटनेस प्रमाण पत्र और सुरक्षा जांच जरूरी होती है। लेकिन आरोप है कि इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना ही क्रूज को संचालन की अनुमति दे दी गई।
अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सवाल उठता है कि बिना जांच और मंजूरी के इतना बड़ा यात्री क्रूज कैसे चल रहा था।
Bragi Dam: मौसम चेतावनी के बावजूद नहीं उठाए गए कदम
इस मामले में मौसम विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शपथ पत्र में कहा गया है कि खराब मौसम को लेकर पहले से चेतावनी जारी की गई थी।
इसके बावजूद समय रहते जरूरी सुरक्षा कदम नहीं उठाए गए। आरोप है कि संबंधित विभाग और अधिकारियों ने मौसम की स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। इससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई।
तेज हवाओं और खराब मौसम के दौरान जल पर्यटन गतिविधियों को रोकना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहने का दावा किया गया है।
Bragi Dam: दूसरे राज्यों की व्यवस्था का दिया उदाहरण
अखिलेश त्रिपाठी ने अपने हलफनामे में गोवा, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों का उदाहरण दिया है। उनका कहना है कि इन राज्यों में जल पर्यटन के लिए मजबूत सुरक्षा नियम लागू हैं।
वहां क्रूज और अन्य जलयान संचालन से पहले कई स्तरों पर जांच की जाती है। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
वहीं मध्य प्रदेश में ऐसी मजबूत व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके कारण भविष्य में भी ऐसी घटनाओं का खतरा बना रह सकता है।
Bragi Dam: जांच आयोग करेगा जिम्मेदारी तय
अब इस मामले में जांच आयोग की नजर प्रशासनिक और पर्यटन विभाग के अधिकारियों पर है। आने वाले दिनों में उन अधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है, जिनकी भूमिका क्रूज संचालन की अनुमति देने में रही है।
आयोग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि आखिर किन परिस्थितियों में नियमों को नजरअंदाज किया गया। साथ ही यह भी जांच होगी कि सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना क्रूज संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई।
फिलहाल बरगी बांध क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।











