नई दिल्ली. केंद्र सरकार और रेलवे के कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) के तहत निवेश से जुड़ी बड़ी और राहत भरी खबर है। कर्मचारियों के लिए अब अपनी पेंशन राशि निवेश करने के विकल्प चार से बढ़ाकर छह कर दिए गए हैं।
कर्मचारियों को पेंशन फंड पर बेहतर मुनाफा (रिटर्न) दिलाने के उद्देश्य से पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने निवेश नियमों का दायरा बढ़ाते हुए दो नए विकल्प जोड़े हैं। इस नई व्यवस्था को रेलवे बोर्ड ने भी अपने सभी जोनल कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों में 24 सितंबर से लागू कर दिया है।
अब तक कर्मचारियों के पास निवेश के बेहद सीमित रास्ते थे। लगभग 96 प्रतिशत कर्मचारियों का पैसा सीधे ‘डिफ़ाल्ट स्कीम’ में जाता था, जिसे केवल तीन सरकारी पेंशन फंड ही संभालते थे। खुद विकल्प चुनने पर भी शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा बहुत कम थी, जिससे सेवानिवृत्ति पर बड़े फंड की गुंजाइश सीमित रहती थी। साथ ही कर्मचारियों को अपनी पसंद का फंड मैनेजर चुनने की छूट भी नहीं थी।
नए नियमों के बाद कर्मचारियों के सामने मौजूद कुल छह विकल्पों में पहला डिफ़ाल्ट स्कीम, दूसरा 100 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियां (जी-सेक), तीसरा लाइफ साइकिल 25-लो (अधिकतम 25 प्रतिशत इक्विटी) और चौथा लाइफ साइकिल 50-माडरेट (अधिकतम 50 प्रतिशत इक्विटी) शामिल है। इनके अलावा दो नए विकल्प जोड़े गए हैं। पांचवां विकल्प लाइफ साइकिल 75-हाई है, जिसमें 35 वर्ष की आयु तक 75 प्रतिशत तक अंशदान शेयर बाजार में लगाया जा सकेगा, जो उम्र के साथ 55 वर्ष पर घटकर 15 प्रतिशत रह जाएगा। छठां विकल्प लाइफ साइकिल-अग्रेसिव है, जिसमें 45 वर्ष की आयु तक 50 प्रतिशत और 55 वर्ष तक 35 प्रतिशत तक निवेश शेयर बाजार में बना रहेगा।
रेलवे बोर्ड के वित्त (स्थापना)-तृतीय के उप निदेशक रमेश चंद्र पांडेय के अनुसार डिफ़ाल्ट व्यवस्था से बाहर आने वाले कर्मचारी पीएफआरडीए में पंजीकृत सभी 10 पेंशन फंड मैनेजरों में से किसी को भी चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि, शेयर बाजार में अधिक निवेश से रिटर्न की संभावनाओं के साथ बाजार जोखिम भी जुड़ा रहता है। नियामक ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे एनपीएस ट्रस्ट की वेबसाइट (www.npstrust.org.in) पर फंड मैनेजरों का पिछला प्रदर्शन देखकर ही सोच-समझकर चुनाव करें। सीआरए पोर्टल पर यह सुविधा तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है और कर्मचारी अपने प्रान (पीआरएएन) खाते से लागिन कर आसानी से अपना विकल्प चुन सकते हैं।








